08 Aug 2026
नवादा, 08 अगस्त (एजेंसी)।नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर आरोपों में हाई कोर्ट से बरी पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव के विरुद्ध बिहार सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई है। नवादा में उनके समर्थकों में हताशा देखी जा रही है। निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी,जिसे पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने दोषमुक्त कर दिया था।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका में कहा है कि उच्च न्यायालय ने कई ठोस प्रमाणों को नजर अंदाज कर पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद को दुष्कर्म के गंभीर मामले में रिहा किया है ।
बिहार सरकार ने अपने पक्ष में कहा है कि महिला चिकित्सक की रिपोर्ट की निचली अदालत में कहीं चर्चा भी नहीं है ।वह रिपोर्ट इस मुकदमे की संचिका का हिस्सा भी नहीं है ।बावजूद उसके आधार पर रिहाई किया जाना, न्याय संगत नहीं है।बिहार सरकार के अधिवक्ता ने यह भी कहा है कि दुष्कर्म पीड़ित बालिका की उम्र को प्रमाण पत्र के आधार पर नजरअंदाज करने तथा उसके गवाही को नजरअंदाज करना न्याय संगत नहीं है।साथही यह भी कहा गया है कि जिसके साथ दुष्कर्म हुआ है, उसकी गवाही पर भी सजा निश्चित तौर पर बरकरार रखी जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं कर न्याय का गला घोटा गया है ।इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अगली तारीख निर्धारित की है। एक बार फिर बिहार सरकार ने पूर्व मंत्री राजबल्लभ के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का रास्ता चुना है।
राजबल्लभ की पत्नी विभा देवी राष्ट्रीय जनता दल से इस्तीफा देकर जनता दल यूनाइटेड की टिकट पर नवादा से विधायक बनी हैं ।अब सम्राट सरकार ही उनके पति के रिहाई के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने के मामले काे लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है। बिहार सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से राजबल्लभ प्रसाद की परेशानियां बढ़ गई है।