08 Aug 2026
नई दिल्ली, 08 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को विज्ञान भवन में आयोजित मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ बैठक की। यह बैठक इंडिया मेडिकल डिवाइस-2026 के दूसरे दिन आयोजित की गई।
इस कार्यक्रम का आयोजन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से किया। बैठक में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश-विदेश की चिकित्सा उपकरण बनाने वाली कंपनियों और लघु एवं मध्यम उद्यमों के 40 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में भारत के चिकित्सा उपकरण उद्योग को मजबूत बनाने, नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने, देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने तथा भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर व्यापक चर्चा हुई।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले नए आविष्कारों और तकनीकों का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ठोस वैज्ञानिक और चिकित्सकीय प्रमाण जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि नई चिकित्सा तकनीकों को मंजूरी देने, उनके उपचार खर्च की प्रतिपूर्ति तय करने और सरकारी खरीद से जुड़े निर्णयों का आधार विश्वसनीय चिकित्सकीय प्रमाण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों की प्रभावशीलता और मरीजों के स्वास्थ्य पर उनके वास्तविक प्रभाव का सही आकलन तभी संभव है, जब उनके पक्ष में उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सकीय आंकड़े उपलब्ध हों। ऐसे प्रमाणों के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि कोई नई तकनीक कितनी प्रभावी और लागत के लिहाज से कितनी उपयोगी है।
डॉ. बहल ने आगाह किया कि यदि नई चिकित्सा तकनीकों के लिए आवश्यक प्रमाण जुटाने से छूट दी जाती है, तो बाद में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी आकलन, उपचार खर्च की प्रतिपूर्ति और सरकारी खरीद के स्तर पर उनकी उपयोगिता साबित करना मुश्किल हो सकता है।
बैठक में प्रतिभागियों ने कहा कि भारत में नई चिकित्सा तकनीकों को तेजी से अपनाने के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिससे नवाचार को प्रोत्साहन मिले और स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित हो।
चर्चा में विश्वसनीय चिकित्सकीय प्रमाण, पारदर्शी स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी आकलन, उचित मूल्य निर्धारण, टिकाऊ प्रतिपूर्ति व्यवस्था, चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी और बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था को आवश्यक बताया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि नई चिकित्सा तकनीकों तक मरीजों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ उपचार को किफायती बनाए रखना और स्वास्थ्य व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
बैठक में औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील कुमार बर्णवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप, फिक्की की मेडिकल डिवाइस समिति के अध्यक्ष तुषार शर्मा तथा सह-अध्यक्ष हिमांशु बैद और भरत शेषा ने भी बैठक में भाग लिया।
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