08 Aug 2026
प्रयागराज, 8 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को युवाओं और छात्रों से देश की व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रेम और अहिंसा का रास्ता अपनाने का आह्वान किया। प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जुटे छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि युवा भारत की ताकत, शक्ति और गौरव हैं तथा देश का भविष्य उनके हाथों में है।
राहुल गांधी ने अपने संवाद की शुरुआत प्रयागराज और पुराने इलाहाबाद से अपने परिवार के जुड़ाव का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को तीन शब्दों- ‘डेटा, दर्द और दौलत’ के जरिए समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास डेटा है और वे रोजगार तथा अवसरों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि आर्थिक संसाधनों पर कुछ लोगों का अधिक नियंत्रण है।
उन्होंने कहा कि जब परिस्थितियां कठिन थीं और चारों ओर अंधकार दिखाई दे रहा था, तब छात्रों और युवाओं ने अपनी आवाज उठाकर रोशनी दिखाई। राहुल गांधी ने युवाओं से कहा कि बदलाव की कोशिश नफरत और हिंसा के जरिए नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और अहिंसा के रास्ते से होनी चाहिए।
रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने देश में रोजगार और शिक्षा के अवसरों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों, सार्वजनिक क्षेत्र, विनिर्माण और निजी क्षेत्र में युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर नहीं बन पा रहे हैं।
उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति का जिक्र करते हुए नोटबंदी और जीएसटी के क्रियान्वयन की आलोचना की। उनका कहना था कि इन नीतियों का रोजगार और छोटे कारोबारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
सरकार, भाजपा और आरएसएस पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में देश की मौजूदा राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था को लेकर सरकार, भाजपा और आरएसएस पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का केंद्रीकरण बढ़ा है।
उन्होंने भाजपा के वित्तीय संसाधनों में वृद्धि और उद्योगपति गौतम अदाणी की संपत्ति बढ़ने का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव कुछ सीमित समूहों के हाथों में केंद्रित हो रहा है।
आरएसएस को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन विभिन्न संस्थानों में अपनी विचारधारा का प्रभाव बढ़ा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, नौकरशाही, न्यायपालिका, मीडिया और अन्य संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे संस्थानों की स्वतंत्रता और युवाओं की सोच प्रभावित हो सकती है।
राहुल गांधी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय का भी उल्लेख किया और विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति पर अपनी चिंता जाहिर की।
छात्रों ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों ने परीक्षा और भर्ती व्यवस्था से जुड़े अपने अनुभव राहुल गांधी के साथ साझा किए। उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं और रोजगार से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया।
कुछ छात्रों ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद बिहार में कथित तौर पर उन्हें परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप छात्रों की ओर से कार्यक्रम के दौरान साझा किए गए अनुभवों पर आधारित थे।
‘आप भारत की ताकत और भविष्य हैं’
राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से कहा कि भारत में बड़ी युवा आबादी है और इसकी क्षमता देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा और क्षमता का इस्तेमाल सकारात्मक बदलाव के लिए करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि युवा भारत की “आत्मा, भविष्य, ताकत और गौरव” हैं। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के पास बुद्धिमत्ता, कल्पनाशक्ति और क्षमता है और देश आगे बढ़ेगा तो उसमें उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं से नफरत और हिंसा से दूर रहने की अपील करते हुए प्रेम और सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।