08 Aug 2026
नई दिल्ली/प्रयागराज, 8 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को देश में रोजगार, शिक्षा और युवाओं के अवसरों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हजारों छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था युवाओं को अवसरों से वंचित कर उन्हें एक ‘चक्रव्यूह’ में फंसा रही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सत्य, प्रेम और अहिंसा के रास्ते से बदलने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था भाजपा-आरएसएस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा उद्योगपति गौतम अडानी के हित में काम कर रही है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्होंने डर का सामना करते हुए व्यवस्था के अंधेरे में ‘रोशनी की मशाल’ जलाई है और अब इस मशाल को पूरे देश में आगे ले जाने की जरूरत है।
‘डाटा और ताकत युवाओं की, लेकिन दौलत पर दूसरों का नियंत्रण’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं की समस्याओं को ‘डाटा, दर्द और दौलत’ के संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि डाटा और ताकत युवाओं के पास है, लेकिन व्यवस्था ने उन्हें रोजगार और अवसरों के अभाव के बीच ‘चक्रव्यूह’ में फंसा रखा है।
उन्होंने दावा किया कि परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद युवाओं के हाथ में केवल डिग्री रह जाती है और रोजगार की कोई गारंटी नहीं होती। उन्होंने पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में प्रति 1,000 युवाओं में केवल 12 लोगों को ही पक्की नौकरी मिल पा रही है। उन्होंने सरकारी नौकरियों में चयन की कठिनाई का भी जिक्र किया और कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के मुकाबले बहुत कम युवाओं का चयन हो पाता है।
रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हुए हैं। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की मौजूदगी बढ़ी है और ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिला है।
उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योगों को बैंक ऋण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में रोजगार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जहां करीब 14 लाख नौकरियां थीं, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर लगभग सात लाख रह गई।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल का रोजगार पर असर पड़ सकता है और कॉरपोरेट क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित होने की आशंका है।
‘युवा और डाटा 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था का आधार’
राहुल गांधी ने भारत की करीब 40 करोड़ की युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत की आर्थिक प्रगति युवाओं की क्षमता और उनके डाटा पर निर्भर करेगी।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई के लिए डाटा जरूरी है और युवाओं के डाटा के बिना इसका विकास संभव नहीं है। उनका तर्क था कि डाटा से एआई तैयार किया जा सकता है, लेकिन एआई अपने स्तर पर डाटा का मूल स्रोत नहीं बन सकता।
उन्होंने युवाओं के डाटा के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को युवाओं के डाटा का लाभ मिल रहा है, जबकि युवाओं को पर्याप्त आर्थिक अवसर नहीं मिल रहे हैं।
सोशल मीडिया को ‘नया नशा’ बताया
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और युवाओं के बीच बढ़ते इस्तेमाल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया को ‘21वीं सदी का नया नशा’ बताते हुए युवाओं को इसके प्रति सचेत रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि युवाओं को कंटेंट और रील बनाने की ओर आकर्षित किया जा रहा है, जबकि उन्हें स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने डिलीवरी और कैब सेवाओं में काम करने वाले युवाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी क्षमताओं के अनुरूप रोजगार के अवसर पैदा होने चाहिए।
आरएसएस और भाजपा पर लगाए राजनीतिक आरोप
राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरएसएस और भाजपा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों सहित विभिन्न संस्थानों में आरएसएस से जुड़े लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है और इससे विचारों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में उद्योगपति गौतम अडानी की संपत्ति में कई गुना वृद्धि हुई है। साथ ही भाजपा के बैंक बैलेंस में वृद्धि का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े और दावे राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान रखे।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ने और चुनावों में ‘वोट चोरी’ का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कार्यक्रम के दौरान विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए।
‘नफरत नहीं, मोहब्बत के रास्ते पर चलें’
छात्रों के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं ने डर का सामना करते हुए अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि छात्रों की इस ऊर्जा को नफरत या हिंसा की दिशा में नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सत्य और अहिंसा की रही है और युवाओं के दिल में नफरत के बजाय प्रेम होना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रेम, सत्य और अहिंसा को माध्यम बनाया जाना चाहिए।
प्रयागराज से परिवार के जुड़ाव का किया उल्लेख
राहुल गांधी ने प्रयागराज से अपने परिवार के पुराने जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का घर इस शहर में रहा है और यहां आकर उन्हें खुशी होती है।
उन्होंने प्रयागराज को ज्ञान का केंद्र बताते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुराने गौरव का उल्लेख किया और कहा कि एक समय यह देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में गिना जाता था।
छात्रों ने परीक्षा और भर्ती व्यवस्था के अनुभव साझा किए
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों को भी मंच पर बुलाया गया। छात्रों ने उत्तर प्रदेश और बिहार में परीक्षा तथा भर्ती व्यवस्था से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
कुछ छात्रों ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया और दावा किया कि इसके विरोध में बंद का आह्वान करने के बाद बिहार में उन्हें प्रशासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश से आए एक छात्र ने राज्य में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर अपनी चिंता जताई और इसे वर्तमान सरकार के कार्यकाल से जोड़कर देखा।
कार्यक्रम में छात्रों की ओर से उठाए गए इन मुद्दों और राहुल गांधी के आरोपों के बीच रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने रहने के संकेत मिले।