08 Aug 2026
प्रयागराज, 8 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। पूर्व सांसद और अपराध जगत से जुड़े रहे अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान अतीक के जेल में बंद दोनों बड़े बेटे उमर और अली भी मौजूद रहे। दोनों को अदालत से मिली अस्थायी पैरोल के तहत कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज लाया गया था। अंतिम रस्म पूरी होने और परिवार से मुलाकात के बाद पुलिस उन्हें वापस जेल लेकर रवाना हो गई।
अबान की मौत दो दिन पहले झांसी में हुए सड़क हादसे में हुई थी। उस दिन अबान अपने जेल में बंद भाई अली से मिलने के लिए प्रयागराज से झांसी जा रहा था। रास्ते में वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसकी मौत हो गई। हादसे में एक अन्य व्यक्ति की भी जान गई, जबकि कुछ अन्य लोग घायल हुए थे।
अली और उमर को अदालत से मिली थी अस्थायी पैरोल
अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उसके बड़े भाइयों उमर और अली की ओर से अदालत से अनुमति मांगी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अस्थायी पैरोल प्रदान की। इसके बाद जेल प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों को प्रयागराज लाया गया।
उमर और अली को परिवार के सदस्यों से मुलाकात के लिए भी सीमित समय दिया गया। दोनों की मौजूदगी को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। कब्रिस्तान के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए। एक रिपोर्ट में मौके पर एक हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की बात कही गई है।
कब्रिस्तान के बाहर जुटी बड़ी भीड़
अबान के अंतिम संस्कार की सूचना के बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान के आसपास बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। उमर और अली के वहां पहुंचने के दौरान भीड़ बढ़ गई, जिसके बाद पुलिस को सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभालने में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। प्रशासन की कोशिश रही कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो और किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
अबान को उसके पिता अतीक अहमद की कब्र के पास दफनाए जाने की जानकारी सामने आई है। परिवार के लिए यह अंतिम संस्कार इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि अतीक के पांच बेटों में से अबान सबसे छोटा था और उसके दो बड़े भाई इस समय अलग-अलग मामलों में जेल में हैं।
कुछ देर के लिए परिवार एक जगह जुटा
अबान के अंतिम संस्कार के दौरान अतीक परिवार के लिए लंबे समय बाद एक ऐसा मौका आया, जब जेल में बंद दोनों बड़े बेटे उमर और अली अपने छोटे भाई को अंतिम विदाई देने के लिए प्रयागराज पहुंच सके। हालांकि यह मुलाकात बेहद सीमित समय और कड़ी पुलिस निगरानी में हुई।
रस्म पूरी होने के बाद पुलिस दोनों भाइयों को वापस जेल ले गई। इस तरह अंतिम संस्कार के लिए मिली अस्थायी राहत के बाद दोनों को फिर अपनी-अपनी न्यायिक हिरासत में लौटना पड़ा।
झांसी जाते समय हादसे में हुई अबान की मौत
अबान की मौत गुरुवार को झांसी में हुए सड़क हादसे में हुई थी। उस दिन वह अपने जेल में बंद भाई अली से मिलने के लिए जा रहा था। वाहन के डिवाइडर से टकराने के बाद हादसा हुआ और अबान तथा एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में वाहन में सवार अन्य लोगों के घायल होने की भी सूचना है।
हादसे के बाद अबान का शव प्रयागराज लाया गया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू की गईं। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए।
अतीक परिवार पर पहले भी पड़ चुके हैं कई संकट
अबान की मौत ऐसे समय हुई है जब अतीक अहमद का परिवार पिछले कुछ वर्षों से लगातार कानूनी और आपराधिक मामलों के कारण चर्चा में रहा है। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की अप्रैल 2023 में प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले अतीक के बेटे असद की झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। असद को भी बाद में प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया गया था।
अतीक के बड़े बेटे उमर और दूसरे बेटे अली अलग-अलग मामलों में जेल में हैं। अबान और उसके भाई एहजम पहले नाबालिग होने के कारण बाल संरक्षण गृह में रहे थे। बाद में दोनों को रिश्तेदार की देखरेख में रखा गया था। अबान के खिलाफ वर्ष 2025 में एक वायरल वीडियो को लेकर प्रयागराज में मामला भी दर्ज किया गया था।
अतीक परिवार की कहानी में एक और दुखद अध्याय
अतीक अहमद की मौत और असद के एनकाउंटर के बाद अबान की सड़क हादसे में मौत परिवार के लिए एक और बड़ा झटका है। शनिवार को प्रयागराज में हुई अंतिम विदाई के दौरान पुलिस की कड़ी निगरानी, जेल से आए दोनों भाइयों की सीमित मौजूदगी और बड़ी संख्या में जुटे लोगों के बीच अबान को उसके पिता की कब्र के पास दफना दिया गया।
अंतिम संस्कार के बाद उमर और अली को फिर जेल भेज दिया गया। इस तरह कुछ घंटों के लिए परिवार के बिखरे सदस्यों का एक हिस्सा एक जगह जरूर जुटा, लेकिन रस्म पूरी होते ही दोनों भाइयों को दोबारा जेल लौटना पड़ा।