08 Aug 2026
पोर्ट ब्लेयर, 8 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की ऐतिहासिक सेल्युलर जेल का दौरा कर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीद स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित की और वीर सावरकर की उस कोठरी में भी श्रद्धांजलि दी, जहां उन्होंने कारावास के दौरान समय बिताया था।
उपराष्ट्रपति ने अपने दौरे के दौरान स्वतंत्र ज्योति, केंद्रीय टावर, फांसीघर तथा संग्रहालय और प्रदर्शनी दीर्घा का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की गाथा पर आधारित लाइट एंड साउंड शो भी देखा।
सावरकर को बताया निर्भीक क्रांतिकारी
सेल्युलर जेल में अपने संबोधन में राधाकृष्णन ने वीर सावरकर को एक विशिष्ट और निर्भीक क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि सावरकर की देशभक्ति ने कई पीढ़ियों के युवाओं को प्रेरित किया।
उपराष्ट्रपति ने सावरकर के जेल जीवन और वहां झेली गई कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को जेल भेजने का उद्देश्य उनका मनोबल तोड़ना था, लेकिन सावरकर का मनोबल नहीं टूटा। उन्होंने कहा कि अंततः ब्रिटिश शासन का मनोबल कमजोर हुआ।
राधाकृष्णन ने सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता के खिलाफ सावरकर के योगदान का भी उल्लेख किया।
‘आजादी का मतलब किसी के आदेश में नहीं चलना’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का अधिक शक्तिशाली बनने का प्रयास दूसरे देशों पर अपनी शर्तें थोपने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत को दुनिया में कोई दूसरा देश अपने निर्देशों के अनुसार चलने के लिए बाध्य न कर सके।
उन्होंने इसे वास्तविक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि भारत की ताकत का उद्देश्य दूसरों को निर्देश देना नहीं, बल्कि किसी के निर्देश में न चलना है।
दो दिवसीय अंडमान दौरे पर हैं उपराष्ट्रपति
सीपी राधाकृष्णन दो दिवसीय अंडमान एवं निकोबार दौरे पर हैं। द्वीप समूह पहुंचने पर श्री विजयपुरम स्थित आईएनएस उत्क्रोश में उपराज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी (सेवानिवृत्त) और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
अपने दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत से जुड़े कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप का दौरा भी करेंगे।
सेल्युलर जेल का उनका दौरा स्वतंत्रता आंदोलन के उन सेनानियों को स्मरण करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान यहां कठोर कारावास और कठिन परिस्थितियों का सामना किया था।