10 Aug 2026
नई दिल्ली, 10 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में सोमवार को भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध कायम रहा। विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी कामकाज आगे बढ़ाए। लोकसभा में चार विधेयक पेश किए गए और ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 को पारित कर दिया गया, जबकि राज्यसभा ने बैंकर्स' बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को मंजूरी दी। संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को भी मंजूरी दे दी।
मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और अब इसके केवल चार कार्यदिवस शेष हैं। सत्र के दौरान लगातार हंगामे और स्थगन के चलते विधायी कामकाज प्रभावित रहा है। विपक्ष जहां छात्रों के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार एवं चंदे के दुरुपयोग के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सरकार छात्रों के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए तैयार होने की बात कह रही है। दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर सोमवार को भी सहमति नहीं बन सकी।
लोकसभा में चार विधेयक पेश
लोकसभा में सोमवार को ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026, माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026, केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किए गए।
इनमें ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल को लोकसभा ने पारित भी कर दिया। प्रस्तावित कानून में विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक समान व्यवस्था बनाने तथा नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन स्थापित करने का प्रावधान है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य न्यायाधिकरणों में नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और एकरूप बनाना है।
माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल के जरिये खनिज अधिकारों पर राज्यों की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त करों को लेकर प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके अलावा खनिज संपदा वाले क्षेत्रों के नियमन में केंद्र की भूमिका बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
वहीं केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल के जरिये राज्य का नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक केरल विधानसभा की ओर से पारित प्रस्ताव के आधार पर लाया गया है।
राज्यसभा में बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़ा विधेयक पास
राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स' बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पेश किया। विधेयक का उद्देश्य 1891 के पुराने कानून को बदलना और बैंकिंग रिकॉर्ड की परिभाषा को इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और अन्य आधुनिक रिकॉर्ड तक विस्तारित करना है। विधेयक को संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इसके अलावा राज्यसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को भी मंजूरी दी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कानून से यूपीआई लेनदेन पर तत्काल कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है और यूपीआई भुगतान व्यवस्था फिलहाल मुफ्त बनी रहेगी। विधेयक में भुगतान प्रणालियों और कर कानूनों से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं।
विपक्ष का हंगामा, दोनों सदनों में कार्यवाही बाधित
दिन की शुरुआत से ही विपक्षी सांसदों ने छात्रों के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध किया। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दें। इसके साथ ही विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और चंदे के दुरुपयोग के आरोपों पर भी सदन में चर्चा की मांग की।
हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरुआती दौर में स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी विपक्ष के विरोध का असर दिखाई दिया। विपक्षी दलों का कहना है कि केवल छात्रों के मुद्दे पर चर्चा का सरकार का प्रस्ताव पर्याप्त नहीं है और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा कराई जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में कहा कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर सदन में बयान नहीं देते, तब तक गतिरोध समाप्त होने की संभावना नहीं है। कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदनों में मौजूद रहने के लिए व्हिप भी जारी किया है।
बीएसी बैठक में भी नहीं बनी सहमति
संसद की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध दूर नहीं हो सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन पर पूरी और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है तथा गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देंगे। विपक्ष ने हालांकि कहा कि उसे इस बात पर स्पष्ट आश्वासन चाहिए कि पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादतियों पर भी गृह मंत्री जवाब देंगे।
विपक्ष ने नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल और माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल को संबंधित स्थायी समितियों के पास भेजने की मांग भी की। साथ ही केरल का नाम बदलने संबंधी विधेयक को शीतकालीन सत्र तक टालने की मांग रखी गई, लेकिन सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई प्रतिबद्धता नहीं दी गई।
महत्वपूर्ण विधेयकों पर नजर
मानसून सत्र में अब तक पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, नेशनल ऑनर के अपमान की रोकथाम संबंधी संशोधन विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक और एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। सोमवार को ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल और बैंकर्स' बुक्स एविडेंस बिल के आगे बढ़ने से सरकार के विधायी एजेंडे को सत्र के अंतिम दिनों में गति मिली है।
हालांकि महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। सोमवार की बीएसी बैठक में एफसीआरए संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा नहीं हुई। ऐसे में मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के साथ-साथ इन महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को लेकर भी नजरें संसद पर बनी रहेंगी।