11 Aug 2026
नई दिल्ली, 11 अगस्त (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा लिए एक अतिरिक्त पर्सनल सिक्योरिटी अफसर (पीएसओ) उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा कि ये पीएसओ पप्पू यादव की सुरक्षा में तब तक रखा जाएगा, जब तक केंद्र सरकार सांसद यादव की सुरक्षा पर कोई फैसला नहीं कर लेती।
आज सुबह जब सुनवाई हुई, तो कोर्ट ने केंद्र से पप्पू यादव की सुरक्षा बढ़ाने को कहा। तब केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने कहा कि सुरक्षा बढ़ाने को लेकर दिए गए उनके प्रतिवेदन पर सरकार विचार कर रही है और इसके लिए अंतरिम उपाय किए जा रहे हैं। तब कोर्ट ने कहा कि ये महत्वपूर्ण है। वो एक सांसद हैं। केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा बढ़ाए। आप ये नहीं कह सकते हैं कि हमला मनगढ़ंत था। कोर्ट ने दीक्षित से कहा कि आप दोपहर तक सरकार के निर्देश लेकर आएं। जब दोपहर बाद फिर सुनवाई शुरु हुई, तो आशीष दीक्षित ने कहा कि केंद्र सरकार पप्पू यादव की सुरक्षा बढ़ाने की अर्जी पर तीन हफ्ते में फैसला कर लेगी। उसके बाद कोर्ट ने पप्पू यादव की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त पीएसओ नियुक्त करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान पप्पू यादव की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने कहा था कि उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी के मामले में संसद के बाहर एक नाटक किया था, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। पप्पू यादव ने आरोप लगाते हुए कहा है कि एक अगस्त को उन्हें धमकी दी गई और जान से मारने के लिए इनाम भी घोषित किया गया था। उसके बाद उनकी सांसद पत्नी के आवास के बाहर भीड़ एकत्र हो गई और उन्हें मारने की धमकी दी गई। उस दौरान पप्पू यादव पत्नी के आवास पर ही थे। उसके बाद उन्होंने 2 अगस्त को इसकी शिकायत पुलिस से की और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य दिए गए। बाद में जब 2 अगस्त को पप्पू यादव अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तो उनके ऊपर चप्पल फेंका गया और चाकू से हमला करने की कोशिश की गई।
पप्पू यादव ने याचिका दायर कर कहा है कि उनकी सुरक्षा का आकलन कर पूरे देश में उनकी सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश देना चाहिए। फिलहाल पप्पू यादव को बिहार में वाई प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है। यादव ने याचिका में कहा है कि धमकियां मिलने के बाद उन्होंने पूरे देश में सुरक्षा बढ़ाने के लिए लिखित प्रतिवेदन भेजा, लेकिन गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा पर कोई फैसला नहीं किया। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 का खुला उल्लंघन है।