11 Aug 2026
नई दिल्ली, 11 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। संसद के मानसून सत्र का मंगलवार का दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के नाम रहा। सदनों के भीतर नारेबाजी और हंगामे के बीच जहां सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया, वहीं विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखा। लोकसभा में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने संबंधी विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक पारित किए गए, जबकि राज्यसभा ने ट्रिब्यूनल्स सुधार विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। कई मौकों पर विपक्षी सांसदों के विरोध और वॉकआउट के बीच विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
मानसून सत्र के अंतिम दौर में पहुंचने के साथ ही सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होता दिखाई दिया। विपक्ष का मुख्य दबाव छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े सवालों पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर रहा। दूसरी ओर सरकार ने विपक्ष से सदन चलने देने और उपलब्ध संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की।
लोकसभा में ‘केरलम’ विधेयक पारित
लोकसभा में मंगलवार को सबसे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 का पारित होना रहा। विधेयक के कानून बनने के बाद संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का नाम ‘केरल’ के स्थान पर ‘केरलम’ किए जाने का प्रावधान लागू होगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया। हालांकि विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। विपक्ष की मांग थी कि छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री सदन में अपना पक्ष रखें।
हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस दौरान सदन में सामान्य तरीके से विस्तृत बहस नहीं हो सकी। सरकार की ओर से इसे केरल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे नाम परिवर्तन के अनुरूप कदम बताया गया।
NCDC संशोधन विधेयक भी मंजूर
लोकसभा ने इसके बाद राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पारित कर दिया। सहकारिता क्षेत्र से जुड़े इस विधेयक को सरकार के व्यापक सहकारी सुधार एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने विधेयक को आगे बढ़ाया। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की कार्यप्रणाली और वित्तीय क्षमता को मजबूत करना तथा सहकारी क्षेत्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन सदन में राजनीतिक गतिरोध खत्म नहीं हुआ।
राज्यसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पर मुहर
राज्यसभा में मंगलवार को ट्रिब्यूनल्स सुधार विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई और अंततः इसे पारित कर दिया गया। विधेयक का प्रमुख प्रावधान विभिन्न न्यायाधिकरणों के कामकाज, नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने के लिए राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग की स्थापना से जुड़ा है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि न्यायाधिकरण न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं और इनके माध्यम से लोगों को अपेक्षाकृत जल्द न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। सरकार का तर्क है कि प्रस्तावित आयोग न्यायाधिकरणों की नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित तथा पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।
हालांकि चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर संसदीय परंपराओं की अनदेखी का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सदस्य विरोध में खड़े हो गए। इसके बाद कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष की गैरमौजूदगी के बीच विधेयक को पारित कर दिया गया।
छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष का दबाव कायम
संसद की कार्यवाही के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा छात्र आंदोलन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई बना रहा। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को संसद में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में बयान देने की मांग करता रहा।
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सांसदों ने सदन के भीतर नारेबाजी के अलावा संसद परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्ष का कहना है कि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान होना चाहिए और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि वह संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा के बजाय लगातार हंगामा कर रहा है।
संसद परिसर में आमने-सामने सत्ता और विपक्ष
संसद परिसर में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मुकाबला सदन से बाहर भी दिखाई दिया। एनडीए सांसदों ने विपक्ष के विरोध के जवाब में प्रदर्शन किया। इस दौरान राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए पोस्टर और नारे लगाए गए। एनडीए सांसदों ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया और झारखंड में आंदोलनकारी छात्रों के साथ ज्यादती किये जाने के मुद्दे पर विपक्ष से जवाब मांगा।
दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्र आंदोलन के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग की। मकर द्वार के आसपास दोनों पक्षों के सांसदों के आमने-सामने आने से कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बनी। सुरक्षा कर्मियों ने दोनों पक्षों के बीच घेरा बनाकर स्थिति को नियंत्रित किया।
इस दौरान संसद परिसर में विपक्ष की ओर से अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे से जुड़े कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस विषय पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।
FCRA विधेयक को लेकर विपक्ष में भी मतभेद
संसद में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। इस विधेयक का कांग्रेस विरोध कर रही है, जबकि कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इसे वापस लेने अथवा विस्तृत विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग की है।
इस मुद्दे पर विपक्षी खेमे में पूरी तरह एकरूपता नहीं दिखी। अलग-अलग दलों की अपनी-अपनी आपत्तियां और मांगें सामने आती रहीं। सरकार की ओर से विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए विपक्षी दलों से संवाद की कोशिश भी जारी रही।
अंतिम दिनों में बढ़ेगा राजनीतिक तापमान
मानसून सत्र अब अंतिम चरण में है। सरकार के सामने अपने लंबित विधायी एजेंडे को पूरा करने के लिए सीमित समय बचा है, वहीं विपक्ष छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है।
मंगलवार की कार्यवाही ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि संसद में विधायी कामकाज पूरी तरह ठप नहीं है, लेकिन राजनीतिक गतिरोध ने विस्तृत बहस और सार्थक संसदीय संवाद की गुंजाइश को जरूर सीमित कर दिया है। एक ओर सरकार ने ‘केरलम’, NCDC और ट्रिब्यूनल सुधार जैसे विधेयकों को आगे बढ़ाया, तो दूसरी ओर विपक्ष ने सड़क से संसद तक अपने विरोध को बनाए रखा।
मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव कम होगा या और बढ़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि छात्र आंदोलन समेत विपक्ष के प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्ष किसी न्यूनतम सहमति तक पहुंच पाते हैं या नहीं। फिलहाल संसद के भीतर विधायी एजेंडा और राजनीतिक विरोध समानांतर चलते दिखाई दे रहे हैं।