13 Aug 2026
नई दिल्ली, 13 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चले इस सत्र में कुल 19 बैठकें निर्धारित थीं, लेकिन शायद ही कोई ऐसा दिन रहा हो जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बिना व्यवधान के पूरी चल सकी हो। विपक्ष के लगातार विरोध, सत्ता पक्ष के जवाबी हमलों और संसद परिसर में रोजाना हुए राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण यह सत्र विधायी उपलब्धियों से अधिक राजनीतिक टकराव के लिए चर्चा में रहा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार लोकसभा की उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। यानी तय समय का बड़ा हिस्सा हंगामे और बार-बार स्थगन की भेंट चढ़ गया। सरकार ने माना कि विधायी कामकाज आगे बढ़ा, लेकिन बहस और चर्चा के लिहाज से यह सत्र संतोषजनक नहीं रहा।
यदि निर्धारित समय के आधार पर देखा जाए तो संसद की दोनों सभाओं के लिए लगभग 190 घंटे से अधिक कामकाज निर्धारित था। उत्पादकता के आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में लगभग 36 घंटे और राज्यसभा में करीब 74 घंटे ही प्रभावी कामकाज हो सका। यानी दोनों सदनों में मिलाकर लगभग 110 घंटे ही वास्तविक संसदीय कार्य हो पाया, जबकि आधे से अधिक समय व्यवधानों में निकल गया।
इसके बावजूद सरकार अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाने में सफल रही। सत्र के दौरान 12 विधेयक पेश किए गए, जबकि 11 विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हुए। अंतिम दिन राज्यसभा ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक को मंजूरी देकर सरकार के विधायी एजेंडे को लगभग पूरा कर दिया। सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि अधिकांश विधेयक पर्याप्त चर्चा के बिना पारित कराए गए।
पूरे सत्र में विपक्ष ने दिल्ली के छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई, लोकतांत्रिक अधिकारों और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार सरकार को घेरा। विपक्ष की मांग थी कि इन विषयों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दें। सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात कहती रही, लेकिन चर्चा के प्रारूप और जवाब देने वाले मंत्री को लेकर सहमति नहीं बन सकी। नतीजा यह हुआ कि प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल तक कई बार कार्यवाही बाधित होती रही।
संसद परिसर भी पूरे सत्र में राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और वाम दलों सहित विपक्षी सांसदों ने लगभग रोज प्रदर्शन किए। कई बार विपक्षी नेताओं ने संसद से बाहर मार्च निकाले, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने और चर्चा से बचने का आरोप लगाया। संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज रही।
सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में एक अलग दृश्य देखने को मिला। सदन में 'वंदे मातरम्' की छह कड़ियां पूर्ण रूप से प्रस्तुत की गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अनेक वरिष्ठ नेता उस समय सदन में मौजूद थे। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
यह मानसून सत्र कई मायनों में विरोधाभासों से भरा रहा। एक ओर सरकार ने सीमित समय के बावजूद अपने अधिकांश विधेयक पारित करा लिए, वहीं दूसरी ओर संसद में गंभीर बहस, प्रश्नकाल और जवाबदेही की परंपरा लगातार व्यवधानों के कारण प्रभावित रही। यही कारण है कि यह सत्र संसदीय इतिहास में विधायी उपलब्धियों से अधिक राजनीतिक टकराव, विरोध-प्रदर्शनों और कम उत्पादकता वाले सत्र के रूप में दर्ज होगा।