13 Aug 2026
आकाश कुमार
भारत का स्वतंत्रता दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उस लंबे संघर्ष की याद है जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी। दिलचस्प बात यह है कि 15 अगस्त की तारीख दुनिया के इतिहास में भी आजादी और बड़े बदलावों की कई कहानियां समेटे हुए है।
हर साल 15 अगस्त को जब लाल किले की प्राचीर से तिरंगा लहराता है, तो देश उस ऐतिहासिक रात को याद करता है जब भारत ने करीब दो सदियों के ब्रिटिश शासन से आजादी हासिल की थी। 15 अगस्त 1947 सिर्फ सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था, बल्कि यह लाखों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान, जेल यात्राओं और आजादी के सपने के साकार होने का दिन था।
1857 से शुरू हुई आजादी की बड़ी लड़ाई
भारत का स्वतंत्रता संग्राम किसी एक आंदोलन या नेता की कहानी नहीं है। 1857 का विद्रोह अंग्रेजी शासन के खिलाफ बड़े सशस्त्र प्रतिरोध के रूप में सामने आया। मेरठ से शुरू हुई चिंगारी दिल्ली, कानपुर, झांसी, लखनऊ और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंची। मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाह जफर, तात्या टोपे और बेगम हजरत महल जैसे नाम इस संघर्ष से जुड़े।
1857 के बाद अंग्रेजों ने भारत पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन स्वतंत्रता की भावना को दबाया नहीं जा सका। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई और धीरे-धीरे राजनीतिक चेतना देशभर में फैलने लगी।
गांधी के आंदोलनों ने बदली लड़ाई की दिशा
महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन ने जनभागीदारी का नया रूप देखा। 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। इसके बाद असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक जनआंदोलनों में बदल गए।
गांधी के अहिंसक आंदोलनों के साथ-साथ भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और उनके साथियों की क्रांतिकारी गतिविधियों ने भी युवाओं में स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज ने भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया।
15 अगस्त 1947: आजादी के साथ बंटवारे का दर्द
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति कमजोर हो चुकी थी। भारत में लगातार बढ़ते जनआंदोलन और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच आखिरकार ब्रिटिश शासन का अंत हुआ।
14 अगस्त की आधी रात के बाद भारत स्वतंत्र राष्ट्र बना। जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया और स्वतंत्र भारत के नए युग की शुरुआत हुई।
लेकिन आजादी अपने साथ विभाजन का गहरा दर्द भी लेकर आई। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित होना पड़ा और सांप्रदायिक हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
15 अगस्त की तारीख सिर्फ भारत के लिए खास नहीं
दिलचस्प बात यह है कि 15 अगस्त दुनिया के इतिहास में भी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है।
1945 में इसी दिन जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आत्मसमर्पण की घोषणा की, जिसके बाद युद्ध के अंत का रास्ता साफ हुआ। इसी घटनाक्रम के साथ कोरिया को करीब 35 वर्षों के जापानी औपनिवेशिक शासन से मुक्ति मिली। दक्षिण कोरिया में यह दिन आज भी ‘ग्वांगबोकजोल’ यानी ‘प्रकाश की वापसी का दिन’ के रूप में मनाया जाता है।
इसके 15 साल बाद, 15 अगस्त 1960 को कांगो गणराज्य ने फ्रांस से स्वतंत्रता हासिल की। यह वह दौर था जब एशिया और अफ्रीका के कई देश औपनिवेशिक शासन से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बना रहे थे।
एक तारीख, आजादी की कई कहानियां
भारत की आजादी की कहानी अपने आप में अनोखी है, लेकिन 15 अगस्त की वैश्विक ऐतिहासिक घटनाएं इसे और खास बनाती हैं। भारत में यह तारीख हमें 1857 से 1947 तक चले लंबे संघर्ष, असंख्य बलिदानों और लोकतांत्रिक भारत के निर्माण की शुरुआत की याद दिलाती है।
वहीं कोरिया की मुक्ति, जापान का आत्मसमर्पण और कांगो की स्वतंत्रता इस बात की याद दिलाते हैं कि आजादी की चाह किसी एक देश या महाद्वीप तक सीमित नहीं रही।
15 अगस्त इसलिए सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह उन तमाम लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने अपनी आजादी के लिए संघर्ष किया—और उन पीढ़ियों की जिम्मेदारी का भी, जिन्हें मिली हुई स्वतंत्रता को लोकतंत्र, समानता और न्याय के जरिए मजबूत बनाना है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)