14 Aug 2026
जबलपुर, 14 अगस्त (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में करीब 34 करोड़ रुपये के धान परिवहन घोटाला मामले में उच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन (एमपी एससीएसजी) को शपथ पत्र के साथ जवाब देने और आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ में हुई। अदालत ने इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को जल्द जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने उच्च न्यायालय को बताया कि जबलपुर में जांच के दौरान धान परिवहन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 100 से 200 क्विंटल तक धान के परिवहन के लिए दोपहिया और तिपहिया वाहनों के नंबर दर्ज किए गए थे। कुछ मामलों में बसों समेत ऐसे वाहनों से भी धान परिवहन दर्शाया गया, जिनसे इतनी मात्रा में धान ले जाना संभव नहीं था।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जबलपुर में जांच के बाद अलग-अलग लोगों के खिलाफ 90 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि जिस तरह की गड़बड़ी जबलपुर में सामने आई, उससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। याचिका में बताया गया कि मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी समेत कुछ जिलों में भी मामले दर्ज किए गए, लेकिन प्रदेश के बाकी हिस्सों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकार ने प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कार्रवाई सीमित रही। सरकार की ओर से पहले बताया गया था कि कुछ अन्य जिलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। याचिकाकर्ता ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। घोटाले की व्यापकता को देखते हुए प्रदेश स्तर पर इसकी जांच जरूरी है।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर ने सक्रियता नहीं दिखाई होती तो यह मामला सामने नहीं आता। अदालत ने माना कि इसी तरह दूसरे जिलों में भी कलेक्टरों को कार्रवाई करनी चाहिए थी। दस्तावेजों के अवलोकन के बाद युगलपीठ ने पूरे प्रदेश में जांच की जरूरत बताई और सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
उच्च न्यायालय ने ईओडब्ल्यू को जबलपुर धान घोटाले में चल रही जांच और अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। वहीं नागरिक आपूर्ति निगम को शपथ पत्र के साथ यह बताना होगा कि जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई के बाद प्रदेश स्तर पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
गौरतलब है कि विधायक अजय विश्नोई की शिकायत के बाद सामने आए धान घोटाले की जांच में फर्जी परिवहन के जरिए शासन को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का मामला सामने आया। जांच में राइस मिलर्स और एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है।
जांच के मुताबिक 165 फर्जी वाहनों से 694 ट्रिप में करीब 1.53 लाख क्विंटल धान का परिवहन कागजों में दिखाया गया। कई वाहनों की वास्तविक क्षमता 200 क्विंटल से कम थी, लेकिन उनमें 400 क्विंटल तक धान लोड दिखाया गया। 55 कार, पिकअप, ट्रैक्टर और कम क्षमता वाले वाहनों के नंबरों से 614 फर्जी ट्रिप लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई।
जुलाई 2025 में तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना की जांच में घोटाला सामने आया था। इसके बाद जिले के अलग-अलग थानों में 90 से अधिक आरोपितों पर एफआईआर दर्ज की गई। मामले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें एमपीएससीएससी के अधिकारी-कर्मचारी, ऑपरेटर, राइस मिलर्स और सहकारी समितियों के कर्मचारी शामिल हैं। प्रमुख आरोपितों में प्रभारी जिला प्रबंधक दिलीप किरार, ऑपरेटर सुनील प्रजापति, बीएस मेहर और राइस मिलर्स मनदीप सिंह, प्रतीक सक्सेना व संजय जैन शामिल हैं।
जांच में जबलपुर के अलावा मंडला, सिवनी और बालाघाट में भी इसी तरह की गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई है। इसके बाद नागरिक उपभोक्ता मंच ने राज्य स्तरीय जांच की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।