17 Aug 2026
कोलकाता, 17 अगस्त (एजेंसी)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को विधायकों के हस्ताक्षर में कथित फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति कौशिक चंद की एकल पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक पुलिस कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, से मिली अंतरिम सुरक्षा को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया।
मामले की जांच राज्य पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) कर रही है। आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए एक आधिकारिक दस्तावेज में कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए थे।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि दस्तावेज में कुल 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे। इनमें से पांच विधायकों ने अपने हस्ताक्षर फर्जी होने की शिकायत की थी। फोरेंसिक जांच में पांच में से तीन विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं।
राज्य सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया कि हस्ताक्षर में कथित फर्जीवाड़ा अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में किया गया था। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि छह मई को कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था, लेकिन दस्तावेज में उस दिन प्रस्ताव पारित होने का उल्लेख किया गया। उनके अनुसार, विधायकों से उस दिन प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए थे और वास्तविक रूप से दस्तावेज पर 19 मई को हस्ताक्षर किए गए थे।
राज्य सरकार के अनुसार, छह मई की तारीख वाले महासचिव के पैड पर तैयार प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष के पास भेजा गया था। इसके बाद पांच विधायकों ने अपने बयान दर्ज कराए और उनके हस्ताक्षर फर्जी होने की बात कही। फोरेंसिक जांच में भी तीन हस्ताक्षरों के फर्जी होने की पुष्टि हुई है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से आरोपों के संबंध में दलीलें रखे जाने के बावजूद अदालत ने प्रथमदृष्टया यह नहीं माना कि हस्ताक्षर फर्जीवाड़े में अभिषेक बनर्जी की संलिप्तता है। इसके बाद अदालत ने उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया।