17 Aug 2026
- सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से मांगी अब तक जांच प्रगति की सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट
नई दिल्ली, 17 अगस्त (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एसआईटी को मामले में अब तक की जांच प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद उच्चतम न्यायालय दान प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नए निर्देश जारी कर सकता है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों पर निष्पक्ष रुप से विचार किया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच में किसी भी तरह की कमी न रहे और पूरे मामले की पड़ताल प्रभावी तरीके की जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए नयी एसआईटी गठित कर दी गई है। उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने एक फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने एसआईटी से जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि उप्र सरकार ने लखनऊ के आईजी एस किरण की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने दलील दी थी कि देशभर से राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे का ऑडिट होना चाहिए और ट्रस्ट को प्राप्त राशि का वितरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि दानदाताओं को पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
कोर्ट ने 13 जुलाई को ट्रस्ट और उप्र सरकार को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने एसआईटी के गठन से जुड़े रिकॉर्ड तलब किया था। याचिका दो वकीलों अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार, उप्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश देने की मांग की गई है कि वो वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक मेकानिज्म स्थापित करें क्योंकि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
इसके पहले भी एक वकील ने पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय से इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की था। वकील अनूप अवस्थी ने उच्चतम न्यायालय को पत्र लिखकर कहा कि ये मामला देश के करोड़ों लोगों की आस्था के साथ जुड़ा हुआ है। पत्र में मांग की गई कि इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी की जाए। पत्र में कहा गया कि ये मंदिर 2020 में आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बने ट्रस्ट के द्वारा संचालित है। इसकी प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को की गई थी। उसके बाद से इस मंदिर का दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु रोजाना पहुंचते हैं और मंदिर के दानपात्र में दान देते हैं।