17 Aug 2026
नई दिल्ली, 17 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। भारतीय युवा कांग्रेस ने यूजीसी-नेट के तीन विषयों की परीक्षाएं दोबारा कराए जाने को लेकर सोमवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा। भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और दिल्ली विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ. चयानिका उनियाल ने आरोप लगाया कि एनटीए की परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है और इससे उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है। उन्होंने एनटीए के कामकाज पर श्वेतपत्र जारी करने और एजेंसी का तत्काल सरकारी ऑडिट कराने की मांग की।
चिब ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि यूजीसी-नेट परीक्षा होने के करीब दो महीने बाद एनटीए को अपनी गलतियों का पता चला और तीन विषयों की परीक्षाएं दोबारा कराने का फैसला किया गया। परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होने तक इस तरह की घटनाएं जारी रहेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एनटीए की विफलताओं को किस्तों में सामने ला रही है, ताकि छात्रों का गुस्सा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक न पहुंचे। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट किया था कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हटना पहला कदम है, अंतिम नहीं। परीक्षा व्यवस्था में हर स्तर पर जवाबदेही तय करना जरूरी है।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब युवा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से जवाबदेही मांग रहे थे, उस समय दोनों नेता मानसून सत्र के दौरान करीब 20 दिनों तक सदन में नहीं आए। सरकार छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में गंभीरता नहीं दिखा रही है। सभी परीक्षाओं के आवेदन पत्र छात्रों को महज एक रुपये के शुल्क में उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से दोबारा परीक्षा देने आने वाले अभ्यर्थियों के यात्रा और ठहरने का खर्च सरकार वहन करे।
डॉ. चयानिका उनियाल ने कहा कि यह मामला केवल प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका से जुड़ा नहीं है, बल्कि छात्रों के समय, धन, मानसिक तनाव और भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि प्रश्नपत्रों में गलतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और विशेषज्ञों पर कार्रवाई होगी या नहीं और क्या उनके नाम सार्वजनिक किए जाएंगे। एनटीए ने प्रश्नपत्रों में विद्वानों के नाम, किताबों के शीर्षक, व्याकरण, लिंग और उच्चारण से जुड़ी गलतियों को स्वीकार किया है। उन्होंने सवाल किया कि प्रश्नपत्र किसने तैयार किया, उसकी समीक्षा किसने की, उच्चारण का सत्यापन किसने किया और अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी गई।
उनियाल ने एनटीए की परीक्षाओं से संबंधित आंकड़े भी रखे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में एनटीए ने 66 परीक्षाएं आयोजित की थीं, जिनमें 1.33 करोड़ विद्यार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2024 में परीक्षाओं की संख्या घटकर 29 रह गई और इनमें 85.78 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि परीक्षाओं की संख्या और अभ्यर्थियों की भागीदारी में आई कमी छात्रों के बीच एनटीए को लेकर घटते भरोसे को दर्शाती है।
उल्लेखनीय है कि एनटीए ने 16 अगस्त को यूजीसी-नेट जून सत्र के अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र विषयों के प्रश्नपत्रों में कई तरह की त्रुटियां पाए जाने के बाद इनकी पुनर्परीक्षा कराने की घोषणा की थी। अंग्रेजी और वाणिज्य की पुनर्परीक्षा नौ सितंबर तथा समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को होगी। पुनर्परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।