18 Aug 2026
नई दिल्ली, 18 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब मोदी सरकार ने वर्ष 2021 में उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में जातियों का भरोसेमंद और एक समान आंकड़ा जुटाने के लिए विकल्पों की सूची को जरूरी बताया था, तो जनगणना 2027 में ऐसा प्रावधान क्यों नहीं किया गया।
रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर जाति जनगणना की मांग को खारिज किया था। हालांकि, इसी हलफनामे के पैरा 12 (डी) में सरकार ने कहा था कि जातियों की रजिस्ट्री तैयार करने के लिए जातियों के चयन को लेकर विकल्पों की सूची देना बेहतर होगा। उनके अनुसार, इससे भरोसेमंद और एक समान आंकड़े जुटाने में मदद मिल सकती है।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब सरकार ने स्वयं 2021 में उच्चतम न्यायालय के समक्ष जातियों का समान और विश्वसनीय आंकड़ा जुटाने के लिए विकल्पों की सूची की जरूरत बताई थी, तो जनगणना 2027 में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि बिहार और तेलंगाना में किए गए जाति सर्वेक्षणों से पहले भी इस तरह की विकल्प सूची तैयार की गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी 5 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में इसी प्रकार की सूची उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था।
रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को लेकर गंभीर नहीं है और इसे रोकना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 अप्रैल 2025 को जाति जनगणना कराने की घोषणा कर अपना पूर्व रुख बदल दिया था।