18 Aug 2026
अहमदाबाद, 18 अगस्त (एजेंसी)। गुजरात उच्च न्यायालय ने भावनगर जिले के पालिताणा में करीब 1690 बड़े पेड़ों की कथित अवैध कटाई के मामले में जेल में बंद दो फॉरेस्ट गार्ड को जमानत दे दी। अदालत ने दोनों आरोपितों के समक्ष पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए जमानत के साथ कुल 1700 वृक्ष लगाने और तीन वर्ष तक उनकी देखभाल करने की शर्त लगाई है।
मामला पालिताणा रेंज के राजस्थली बीट का है, जहां करीब 1690 बड़े पेड़ों की कथित अवैध कटाई को लेकर फॉरेस्ट गार्ड करशन गोहिल और कल्पेश डाभी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। दोनों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
आरोप है कि दोनों फॉरेस्ट गार्ड ने लकड़ी के ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर करीब 25 हजार रुपये का लाभ लेकर बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई होने दी। मामले में दोनों कर्मचारियों को निलंबित भी किया गया था।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। जब्त सामग्री भी पुलिस के कब्जे में है। दोनों आरोपी निलंबित हैं, इसलिए उनके बाहर आने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।
वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों पर जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उन्हीं पर पेड़ों की अवैध कटाई में भूमिका निभाने का आरोप है। ऐसे आरोपितों को जमानत देने से गलत संदेश जा सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने दोनों आरोपितों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी। साथ ही निर्देश दिया कि जेल से रिहा होने के 15 दिनों के भीतर प्रत्येक आरोपित अपने खर्च पर 850-850 वृक्ष लगाएगा। इस तरह दोनों को कुल 1700 वृक्ष लगाने होंगे।
अदालत ने लगाए गए सभी वृक्षों की तीन वर्ष तक अपने खर्च पर देखभाल करने की भी शर्त रखी है। पौधरोपण और उनकी देखभाल की निगरानी पालिताणा आरएफओ और डीसीएफ, भावनगर करेंगे तथा प्रगति रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में पेश करेंगे। इसके अलावा दोनों आरोपितों को अगले छह महीने तक प्रत्येक महीने एक बार संबंधित रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के समक्ष हाजिरी देनी होगी। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण अथवा उनकी देखभाल से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत स्वतः रद्द मानी जाएगी।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर यह भी टिप्पणी की कि उच्च न्यायालय परिसर में निर्माण के लिए जमीन पर मौजूद करीब 20 पेड़ों को जड़ समेत निकालकर दूसरी जगह लगाने की योजना है, लेकिन इसके लिए मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। अदालत ने इसी संदर्भ में 1690 पेड़ों की कथित कटाई को लेकर गंभीरता जताई।