18 Aug 2026
नई दिल्ली, 18 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के दवा घोटाला में दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को चार हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है। स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के दो जमानतियों की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
इसके पहले कोर्ट ने 17 अगस्त को इस मामले के आरोपित डॉ. विनोद कुमार रंगा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। दोनों आरोपितों को एंटी करप्शन ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। दोनों पर दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी में सात सौ करोड़ रुपये की गड़बड़ी करने का आरोप है। सुनवाई के दौरान डॉ. वत्सला अग्रवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने कहा था कि वो पिछले 40 दिनों से जेल में हैं। याचिकाकर्ता को स्वास्थ्य की समस्याएं हैं, जिसका जिक्र हिरासत के आदेश में भी किया गया है। रमेश गुप्ता ने कहा था कि वत्सला अग्रवाल को बलि का बकरा बनाया गया है, ताकि कुछ उच्च पदस्थ लोगों को बचाया जा सके। उन्होंने कहा था कि वत्सला अग्रवाल के घर से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है।
आरोपित डॉ. विनोद कुमार रंगा की ओर से पेश वकील विजय बिश्नोई ने कहा था कि याचिकाकर्ता 54 दिनों से हिरासत में हैं। उन्होंने कहा था कि अगर जांच एजेंसी जांच के लिए और समय लेना चाहती है, तो याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि वो याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा नहीं करना चाहती है।
इस मामले में एंटी करप्शन ब्रांच ने सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 2 जून को एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करीब सात सौ करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय और दिल्ली सरकार के सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी ने इस हेराफेरी को अंजाम दिया।