19 Aug 2026
शिमला, 19 अगस्त (एजेंसी)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मानव गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है और राज्य सरकार, वन विभाग तथा हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य में कई ऐसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां स्थानीय आबादी नहीं है, लेकिन वहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। अदालत ने उदाहरण के तौर पर चंद्रताल झील, शिकारी देवी मंदिर और चूड़धार मंदिर का उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि इन स्थलों तक मोटर योग्य सड़कों की पहुंच बनने से पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है। न्यायालय के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में सड़क पहुंच बढ़ने से पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है और पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। अदालत ने माना कि यह विषय गंभीर विचार का है।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से चंद्रताल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वन विभाग झील के आसपास रात में कैंप लगाने की अनुमति दे रहा है। अदालत ने सवाल उठाया कि वहां रुकने वाले पर्यटकों से उत्पन्न मानव अपशिष्ट और प्लास्टिक कचरे का निपटान किस प्रकार किया जाता है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा है कि क्या ऐसे स्थानों पर मोबाइल शौचालयों की व्यवस्था उपलब्ध है और प्लास्टिक कचरे के उचित निस्तारण के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं।
मामले में अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (वन) को पहला प्रतिवादी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक को दूसरा प्रतिवादी और हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को तीसरा प्रतिवादी बनाया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश भी जारी किया। न्यायालय ने कहा कि यदि चंद्रताल, शिकारी देवी, चूड़धार या ऐसे अन्य संबंधित स्थलों तक नई सड़कें बनाने अथवा मौजूदा सड़कों को तारकोल से पक्का करने के लिए वन स्वीकृति से जुड़े कोई प्रस्ताव लंबित हैं, तो उन्हें फिलहाल स्थगित रखा जाए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने का मुद्दा महत्वपूर्ण है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।