21 Aug 2026
नई दिल्ली, 21 अगस्त (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर कानून को शुरू से ही दोषपूर्ण करार दिया है। न्यायालय ने कहा कि इसमें किसी नए अपराध को परिभाषित किए बिना ही सजा का प्रावधान कर दिया गया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कानून में केवल 'गैंग' और 'गैंगस्टर' की परिभाषा दी गई है, जबकि जिन गतिविधियों को इसमें शामिल किया गया है, वे पहले से ही भारतीय दंड संहिता और अन्य आपराधिक कानूनों के तहत दंडनीय हैं।
न्यायालय ने कहा कि किसी अलग अपराध का सृजन किए बिना सीधे सजा का प्रावधान करना कानून की गंभीर खामी है। न्यायालय ने अपने फैसले में मशहूर लेखक जॉर्ज ऑरवेल का भी हवाला दिया। न्यायालय ने कहा कि हिंसा रोकने के नाम पर बनाया गया यह कानून कई मामलों में निर्दोष और अनजान नागरिकों के खिलाफ हिंसा और दमन को बढ़ावा देता नजर आता है।
न्यायालय ने दो वकीलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द करते हुए ये टिप्पणी की। न्यायालय ने दो वकीलों शिव प्रताप सिंह और हिमांशु श्रीवास्तव से जुड़े बार एसोसिएशन के चुनाव से जुड़ा था। चुनावी विवाद और उससे जुड़े अनुशासनात्मक एवं आपराधिक मामलों के बाद उन्हें कथित गैंग का सदस्य बताकर गैंगस्टर एक्ट के तहत नामजद किया गया था।