23 Aug 2026
रामगढ़, 23 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित छिन्मस्तिका सीमेंट एंड इस्पात के पावर प्लांट में हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। टरबाइन में अचानक हुए जोरदार विस्फोट के बाद लगी आग की चपेट में आने से तीन इंजीनियरों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों का विरोध जारी रहा। रविवार को बातचीत के बाद प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच 31 लाख रुपए मुआवजा पर सहमति बनने पर गतिरोध समाप्त हुआ।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात पावर प्लांट के कंट्रोल रूम, केबिन में नाइट शिफ्ट के दौरान इंजीनियर ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान टरबाइन में अचानक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। घटना में चार इंजीनियर बुरी तरह झुलस गए। प्रारंभिक तौर पर ओवरहीटिंग और पैनल सिस्टम में खराबी को हादसे की संभावित वजह बताया जा रहा है।
वहीं, प्लांट कर्मियों ने कंट्रोल रूम का एसी कई दिनों से खराब रहने और तापमान नियंत्रण को लेकर प्रबंधन को शिकायत किए जाने का दावा किया है। मृतकों में गढ़वा निवासी इंजीनियर अभिषेक पांडेय भी शामिल हैं। उनके शव का पोस्टमार्टम रिम्स, रांची में कराया गया। वहीं धनबाद और बोकारो निवासी अन्य मृत इंजीनियरों के शव परिजनों द्वारा प्लांट वापस लाए जाने की बात सामने आई। मुआवजे पर सहमति बनने के बाद पुलिस द्वारा आवश्यक पंचनामा एवं पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हादसे के बाद बढ़ते आक्रोश के बीच फैक्ट्री के सीईओ प्लांट पहुंचे। इसके बाद मृतकों के परिजनों, बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, ग्रामीणों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर वार्ता शुरू हुई। बातचीत के बाद मुआवजे को लेकर सहमति बनी। समझौते के अनुसार फैक्ट्री प्रबंधन ने प्रत्येक मृत इंजीनियर के परिजन को कुल 31 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई।
इसके बाद विधायक की मौजूदगी में मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये के चेक तथा अंतिम संस्कार के लिए एक-एक लाख रुपये नकद प्रदान किए गए। मुआवजे पर सहमति बनने के बाद लंबे समय से जारी विरोध समाप्त हुआ और क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने लगी। हादसे को लेकर अब प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटना के तकनीकी कारणों की जांच पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। वहीं घायल तरुण रवानी को जब तक इलाज चलता रहेगा और पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते तब तक कंपनी द्वारा इलाज एवं उनका वेतन मिलता रहेगा।