23 Aug 2026
नई दिल्ली, 23 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। भोजन, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से क्लिनिकल डाइटिशियन एवं वेलनेस कोच डॉ. रिद्धिमा खमेसरा की पुस्तक ‘फूड इज नॉट द एनेमी’ का रविवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (एनेक्सी) में विमोचन किया गया। प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सा, खेल, पोषण और पाक-कला से जुड़े विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।
पुस्तक विमोचन के बाद आयोजित विशेष संवाद में चिकित्सक डॉ. अंशुमान कौशल, लेखक एवं खाद्य विशेषज्ञ पुष्पेश पंत, शेफ विकास चावला और अंतरराष्ट्रीय एथलीट नूपुर श्योरान ने भोजन और स्वास्थ्य के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए। वक्ताओं का कहना था कि भोजन को लेकर अनावश्यक डर और भ्रम फैलाने के बजाय लोगों को उसके साथ संतुलित और सकारात्मक संबंध विकसित करना चाहिए।
खाद्य विशेषज्ञ पुष्पेश पंत ने कहा कि आज भोजन को लेकर लोगों में भ्रम और भय का माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि समस्या भोजन नहीं, बल्कि उसके प्रति हमारी सोच और व्यवहार भी हो सकता है। इसलिए खानपान को अपराधबोध से जोड़ने के बजाय संतुलन और समझदारी के साथ अपनाने की जरूरत है।
एथलीट नूपुर श्योरान ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में केवल मोटिवेशन पर्याप्त नहीं होता। व्यक्ति हर समय प्रेरित नहीं रह सकता, लेकिन अनुशासन और निरंतरता ही लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला बनते हैं।
चिकित्सक डॉ. अंशुमान कौशल ने दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भोजन के बाद कुछ देर टहलने, रक्तचाप की नियमित जांच कराने तथा मधुमेह की निगरानी के लिए समय-समय पर HbA1c परीक्षण कराने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि रात के अंतिम भोजन और सोने के समय के बीच पर्याप्त अंतर रखना बेहतर पाचन और गुणवत्तापूर्ण नींद के लिए लाभकारी होता है।
कार्यक्रम के रैपिड फायर सत्र में शेफ विकास चावला ने कहा कि खिचड़ी जैसे पारंपरिक भारतीय व्यंजन को दोबारा लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने मोटे अनाज (मिलेट्स) के बढ़ते महत्व और भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा पर भी प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. कौशल ने बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के प्रोबायोटिक्स के अनावश्यक सेवन से बचने की सलाह दी।
चर्चा के दौरान सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि "भोजन दुश्मन नहीं है", बल्कि उसकी मात्रा, गुणवत्ता और व्यक्ति की शारीरिक सक्रियता स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि किसी कठिन या अव्यावहारिक लक्ष्य के बजाय छोटी-छोटी अच्छी आदतों को नियमित रूप से अपनाना अधिक प्रभावी और टिकाऊ उपाय है।
कार्यक्रम में आदतों के निर्माण पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने '2-मिनट नियम' का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी नई आदत की शुरुआत छोटे कदम से करनी चाहिए और धीरे-धीरे उसे जीवन का नियमित हिस्सा बनाना चाहिए।
इस अवसर पर पुस्तक की लेखक डॉ. रिद्धिमा खमेसरा सहित सभी अतिथियों ने भोजन, चिकित्सा, खेल और पोषण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।