24 Aug 2026
नई दिल्ली, 24 अगस्त (एजेंसी)। पेपर लीक मामले की सुनवाई कर रहे दिल्ली के राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को आरोपितों के वकीलों को उन दस्तावेज की पड़ताल करने की अनुमति दे दी है, जिन पर चार्जशीट में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भरोसा नहीं किया है। स्पेशल जज अजय गुप्ता ने इस मामले के सभी आरोपितों की न्यायिक हिरासत एक सितंबर करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने आरोपितों के वकीलों को 24, 25, 29 और 31 अगस्त को सीबीआई के दफ्तर में जाकर जांच अधिकारी से समन्वय कर सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक दस्तावेज का परीक्षण करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से पेश वकीलों ने मनीष सिसोदिया के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले हवाला दिया, जिसमें चार्जशीट में भरोसा नहीं करने वाले दस्तावेज की पड़ताल करने का आदेश दिया था। इस दलील का विरोध करते हुए सीबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि अभी चार्जशीट पर संज्ञान लेने का चरण है और कोर्ट को भरोसा किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर ही संज्ञान लेना है।
कोर्ट ने 22 अगस्त को आरोपित धनंजय लोखंडे की अरेस्ट मेमो देने की मांग करने वाली अर्जी खारिज कर दी थी। इसके पहले कोर्ट ने 14 अगस्त को सीबीआई को इस मामले की आगे और जांच करने की अनुमति दे दी थी। 12 अगस्त को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से 13 आरोपितों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। सीबीआई ने जिन लोगों को आरोपित बनाया है, उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। ये सभी आरोपित अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238, 303(2), भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) और 13(1)(ए) और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट की धारा 10 ,धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
इसके पहले कोर्ट ने तीन आरोपितों मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल का लाई डिटेक्टर टेस्ट करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। चार्जशीट पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कहा गया था कि इस मामले में 12 मई को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके तुरंत बाद 72 अफसरों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरु की गई। सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और दूसरे राज्यों के 92 स्थानों पर छापे मारे। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को की गई थी।