24 Aug 2026
नई दिल्ली, 24 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भविष्य की भूमिका को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सामने आई विभिन्न रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि सरकार अंतरिक्ष कार्यक्रम में ISRO की भूमिका को सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
जयराम रमेश ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि पिछले छह दशकों में विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश, यू.आर. राव, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सहित अनेक वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के नेतृत्व एवं दूरदर्शिता से ISRO ने विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐसे में उसकी भूमिका में किसी भी प्रकार की कटौती चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार, जिस प्रकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, उसी तरह अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी आक्रामक निजीकरण की नीति अपना रही है। उनके अनुसार, ISRO की रॉकेट विकास एवं निर्माण संबंधी भूमिका को सीमित करने तथा उपग्रहों से जुड़े अधिकांश कार्य निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि तमिलनाडु में लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे दूसरे स्पेसपोर्ट को भी भविष्य में किसी निजी कंपनी को सौंपे जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित ऐतिहासिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र की भविष्य की भूमिका को लेकर भी प्रश्न खड़े होंगे।
जयराम रमेश ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलना चाहिए और निजी क्षेत्र की भागीदारी का वह विरोध नहीं करते। हालांकि उनका कहना है कि ISRO पहले से ही निजी उद्योगों के साथ सफल साझेदारी के मॉडल पर काम करता रहा है, इसलिए उसे कमजोर करने की आवश्यकता समझ से परे है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में ISRO के 100 से 120 प्रमुख पेशेवर संस्थान छोड़ चुके हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ISRO के एक पूर्व अध्यक्ष, जो वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे, उन्होंने भी ISRO से जुड़े निजीकरण के प्रयासों पर चिंता जताई है। रमेश ने प्रश्न किया कि इस विषय पर ISRO के अन्य पूर्व अध्यक्ष सार्वजनिक रूप से अपनी राय क्यों नहीं रख रहे हैं।
हालांकि, केंद्र सरकार या ISRO की ओर से जयराम रमेश के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पहले भी अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश और निजी कंपनियों की भागीदारी को नवाचार, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कदम बता चुकी है, जबकि ISRO को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और राष्ट्रीय रणनीतिक मिशनों की अग्रणी संस्था बनाए रखने की बात दोहराती रही है।