25 Aug 2026
नई दिल्ली, 25 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दक्षिण दिल्ली के असौला गांव और आसपास के क्षेत्रों में अरावली पहाड़ियों से आने वाले तेज बरसाती पानी और जलभराव की समस्या ने स्थानीय निवासियों का जीवन नारकीय बना दिया है। राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम के अनुसार यह समस्या किसी कुदरती आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि दिल्ली प्रशासन के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, वन विभाग और राजस्व विभाग की अनियमितताओं व लापरवाही का परिणाम है।
सावन-भादों के महीने में स्थिति सबसे ज्यादा विकराल हो जाती है। महज एक घंटे की बारिश होते ही बरसाती नाले में जमा मल-मूत्र और गंदा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। कृष्ण कुमार गौतम ने बताया कि इस समस्या की शुरुआत लगभग 40-45 साल पहले हुई थी, जब अरावली की तरफ से आए पानी के भारी दबाव में असौला गांव का बरसाती बांध टूट गया था। उस दौरान कई कच्चे-पक्के मकान, घरेलू सामान, मुख्य सड़क के दो पुल और आधी किलोमीटर से अधिक सड़क बह गई थी। तब हालात पर काबू पाने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी और तात्कालिक कार्यकारी पार्षद (विकास) ने पीड़ितों को स्थायी आवास देने के निर्देश दिए थे। हालांकि, दशकों बीत जाने के बाद भी वे निर्देश कागजों में ही सिमट कर रह गए और पीड़ित परिवार हर साल इस त्रासदी को झेलने के लिए मजबूर हैं।
उच्चस्तरीय जांच और 21 सदस्यीय समिति की मांग
राष्ट्रीय नागरिक पार्टी ने इस गंभीर जनसमस्या के स्थाई समाधान और मुआवजा वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दिल्ली के उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी ने मांग की है कि किसी भी प्रकार के मुआवजे के भुगतान के लिए वर्ष 1950 के रिकॉर्ड को आधार बनाकर 21 सदस्यीय समिति का गठन किया जाए। यह समिति सुनिश्चित करे कि जिस जमीन के लिए भुगतान किया जा रहा है, वह ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, जोहड़, तालाब, पोखर, चारागाह या नाले की जमीन पर अवैध अतिक्रमण या खरीद-फरोख्त का हिस्सा तो नहीं है।
भू-माफिया और प्रशासनिक सांठ-गांठ का आरोप
पार्टी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के भू-माफिया और संबंधित सरकारी विभागों की मिलीभगत से असौला गांव के अधिकांश जोहड़, पोखर, चरागाह और बरसाती बांध के दोनों तरफ की लगभग 300 मीटर चौड़ी व एक किलोमीटर लंबी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण कार्य हो चुके हैं। आलम यह है कि खसरा नंबर 47 पर स्थित ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक पुलिस चौकी भी इस अवैध अतिक्रमण से नहीं बच सकी। उन्होंने आशंका जताई कि राजस्व विभाग नाले की जमीन को निजी मिल्कियत में बदलकर, मुआवजा बांटने के बाद नाले के नाम पर जमीन अधिग्रहण की आड़ में किसी नई योजना को अंजाम देने की फिराक में है। पार्टी ने प्रशासन से जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की मांग की है।