28 Aug 2026
कोलकाता, 28 अगस्त (एजेंसी)। कोलकाता के कमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व लाेकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के दफ्तर से साइनबोर्ड हटाए जाने के मामले में तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। पार्टी ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग की। शुक्रवार सुबह तृणमूल के वकील किशोर दत्त ने उच्च न्यायालय में मामले का उल्लेख किया।
तृणमूल की ओर से अदालत को बताया गया कि गुरुवार शाम करीब 4:45 बजे कोलकाता नगर निगम के कर्मचारी अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पहुंचे और वहां लगे साइनबोर्ड को हटाने की कार्रवाई शुरू की। पार्टी के वकील ने कहा कि इस मामले की जानकारी गुरुवार को ही उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को दी गई थी। इसके बाद उन्होंने संबंधित पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करने को कहा था।
मामले की सुनवाई के लिए जल्द तारीख देने की मांग पर न्यायमूर्ति रायचौधरी ने तृणमूल के वकील से पहले मुकदमा दायर कर उसका नंबर लाने को कहा। अदालत ने कहा कि मुकदमे का नंबर आने के बाद ही सुनवाई संभव होगी। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि नंबर मिलते ही शुक्रवार को मामले की सुनवाई की जा सकती है। साथ ही मामले के दूसरे पक्ष को भी इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया।
कमैक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय की इमारत तीन हजार वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैली है। गुरुवार शाम नगर निगम के कर्मचारियों ने कार्यालय की छत पर लगे ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ लिखे साइनबोर्ड को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान तृणमूल कार्यकर्ताओं और पुलिस तथा नगर निगम कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
कार्रवाई के दौरान तृणमूल के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों को रोकने की कोशिश की। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में पुलिस और नगर निगम की टीम ने ताला तोड़कर छत पर पहुंचकर साइनबोर्ड को हटा दिया।
इस घटना के बाद पुलिस और नगर निगम के काम में बाधा डालने के आरोप में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में तीन प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं। इनमें अभिषेक बनर्जी के अलावा डेरेक ओ’ब्रायन, वैश्वानर चट्टोपाध्याय और हुमायूं कबीर समेत अन्य लोगों के नाम आरोपी के तौर पर शामिल हैं। तीनों मामले शेक्सपियर सरणी थाने में दर्ज किए गए हैं।
अभिषेक बनर्जी ने कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए आरोप लगाया था कि भाजपा के निर्देश पर नगर निगम ने निजी संपत्ति में अवैध हस्तक्षेप किया है। उन्होंने गुरुवार को ही इस मामले में उच्च न्यायालय जाने की बात कही थी।
साइनबोर्ड हटाए जाने के बाद गुरुवार रात तृणमूल की ओर से उसी स्थान पर पार्टी के नाम वाला एक नया बैनर भी लगाया गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह पार्टी ने निजी संपत्ति में कथित हस्तक्षेप और पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया।