27 Aug 2026
काठमांडू/नई दिल्ली, 27 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। नेपाल में आई भीषण जल प्रलय के तीसरे दिन गुरुवार को भी जिंदगी बचाने की जंग जारी रही। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और राहत एजेंसियों के हेलीकॉप्टर दिनभर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरते रहे और बाढ़ तथा भूस्खलन में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाते रहे। राहत कार्यों में तेजी आई है, लेकिन त्रासदी का दायरा अब भी लगातार बढ़ रहा है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है, 826 से अधिक लोग लापता हैं, जबकि नेपाल और तिब्बत को मिलाकर लापता लोगों की संख्या 1,300 से अधिक बताई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक, प्रवासी कामगार और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े श्रद्धालु भी शामिल हैं।
नेपाल सरकार ने गुरुवार को उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद राहत एवं बचाव अभियान और तेज करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रालयों, सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ बैठक कर प्रभावित जिलों में अतिरिक्त हेलीकॉप्टर, चिकित्सा दल, राहत सामग्री और इंजीनियरिंग टीमों की तैनाती के आदेश दिए। कई गांव अब भी सड़क और संचार संपर्क से कटे हुए हैं, जिससे वास्तविक नुकसान का आकलन अभी पूरा नहीं हो सका है।
भारत की राहत तेज, 285 भारतीयों से अब भी संपर्क नहीं
भारत ने मानवीय सहायता अभियान के तहत राहत सामग्री और खाद्य सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेज दी है। दवाइयों, टेंट, कंबलों, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री से लदे विमान नेपाल पहुंच चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए नई दिल्ली और काठमांडू में 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार 285 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें बड़ी संख्या में पर्यटक, श्रद्धालु और परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि तमिलनाडु के 21 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 33 भारतीय श्रमिकों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। इसके बावजूद चीन (तिब्बत) की ओर कैलाश मार्ग पर लगभग 200 भारतीयों के फंसे होने की सूचना है, जिन तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
कैलाश यात्रा और विदेशी पर्यटकों की बढ़ी चिंता
बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के उत्तरी मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए अनेक श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। राहत एजेंसियां मौसम की चुनौती के बावजूद हेलीकॉप्टरों के जरिए इन इलाकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। नेपाल सरकार ने कई देशों के दूतावासों के साथ समन्वय भी बढ़ाया है।
पनबिजली परियोजनाओं को भारी झटका
इस आपदा ने नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जलविद्युत परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। अनेक पनबिजली संयंत्र, बांध, सुरंगें, ट्रांसमिशन लाइनें और विद्युत उपकेंद्र क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई परियोजनाओं का उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और आर्थिक नुकसान बढ़ने की आशंका है।
अगले 72 घंटे अभी भी भारी
भू-विज्ञानियों और मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तिब्बत के ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में अब भी अस्थिर स्थिति बनी हुई है। वहां लगातार वर्षा और जलसंचय के कारण अगले 72 घंटे नेपाल के लिए अत्यंत संवेदनशील माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों में फिर भारी वर्षा हुई या प्राकृतिक झीलों का जलस्तर बढ़ा तो निचले इलाकों में एक और विनाशकारी बाढ़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
भारत के सीमावर्ती राज्यों में अलर्ट
नेपाल की नदियों में बढ़ते जलस्तर का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। उत्तराखंड के चम्पावत और टनकपुर क्षेत्र में एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक, शारदा, घाघरा तथा नेपाल से आने वाली अन्य नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
राहत जारी, लेकिन चुनौती अभी बाकी
नेपाल में हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। कई गांवों तक सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाने के कारण राहत सामग्री केवल हेलीकॉप्टरों के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। लगातार हो रही वर्षा और भूस्खलन बचाव कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
नेपाल की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा, संवेदनशील पर्वतीय भूभाग और अनियोजित विकास के कारण ऐसी आपदाओं की तीव्रता बढ़ रही है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें नेपाल पर टिकी हैं, जहां समय के साथ राहत अभियान आगे बढ़ रहा है, लेकिन हर गुजरता घंटा लापता लोगों के परिजनों की चिंता भी बढ़ा रहा है।