28 Aug 2026
मुंबई, 28 अगस्त (एजेंसी)। सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियन की मौत मामले में शुक्रवार को बांबे उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि इस मामले के कई पहलुओं की उचित जांच की जरुरत है।
दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन ने अपनी बेटी की वर्ष 2020 में हुई मौत की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए मार्च 2025 में बांबे उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। उनका आरोप है कि पुलिस ने जांच शुरू होने से पहले ही दिशा की मौत को आत्महत्या मानने की धारणा बना ली थी और उसी आधार पर मामले की जांच की गई। इसी याचिका की सुनवाई आज जस्टिस सारंग वी. कोटवाल और जस्टिस रंजीत सिंह भोसले की डिवीजन बेंच में हो रही थी।
दिशा सालियन की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी। पुलिस ने शुरुआत में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। इसके छह दिन बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आईं। हालांकि, पुलिस ने दिशा की मौत में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका से इनकार किया था।
दिशा के पिता की ओर से पेश वकील नीलेश ओझा ने दलील दी कि पुलिस को मामला बंद करने से पहले सभी पहलुओं की उचित जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि दिशा के साथ न तो रेप हुआ और न ही हत्या लेकिन करीब पांच साल तक परिवार को जांच रिपोर्ट दिए बिना ही मामला बंद कर दिया गया। ओझा ने दिशा के शव के इमारत से करीब 10 फीट दूर मिलने का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि यह परिस्थिति आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कोर्ट में कहा, "हमने इसका विश्लेषण करवाया और पाया कि शव को सीधे नीचे गिरना चाहिए था, न कि 10 फीट दूर।"
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शिशिर हिरे ने कोर्ट को बताया कि दिसंबर 2022 में राज्य सरकार ने दोबारा जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और छह लोगों के बयान दर्ज किए। सरकार की ओर से कहा गया कि इन छह लोगों में से किसी ने भी मामले में किसी तरह की गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया।
कोर्ट ने पूछा- ‘जब शक नहीं था तो छह साल तक जांच क्यों?’ सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मामले की उचित जांच जरूरी है, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो। बेंच ने पुलिस से यह भी सवाल किया कि यदि उसे किसी तरह की गड़बड़ी का संदेह नहीं था, तो जांच इतने लंबे समय तक क्यों जारी रखी गई।
बेंच ने यह भी कहा कि दिशा के पिता की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वह इस बात से चिंतित है कि एक पिता ने अपनी बेटी को खोया है और कानून के मुताबिक मामले में उचित जांच होनी चाहिए। हालांकि अदालत ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।