31 Aug 2026
रांची, 31 अगस्त (एजेंसी)। झारखंड उच्च न्यायालय ने सिविल जज जूनियर डिवीजन नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं को सुनवाई के लिए एकल पीठ में भेजने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता अभी न्यायिक अधिकारी नहीं बने हैं और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इसी तरह के एक मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय की एकल पीठ में चल रही है, इसलिए इन मामलों को भी एकल पीठ में भेजने का आग्रह किया गया। राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने भी इस आग्रह पर आपत्ति नहीं जताई।
इसके बाद खंडपीठ ने सिविल जज जूनियर डिवीजन नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली तीनों याचिकाओं को सुनवाई के लिए एकल पीठ में भेजने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थियों ने सिविल जज जूनियर डिवीजन (विज्ञापन संख्या 22 /2023) को चुनौती दी है। मामले में आदित्य भास्कर एवं आयुष कुमार वर्मा ने याचिका दाखिल की है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप, अधिवक्ता अभय आनंद और अधिवक्ता सोनल ने पक्ष रखा।
उल्लेखनीय है कि सीआईडी जांच में मिले तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिसमें टीडीएल शामिल रहा है। इसके अलावा वर्ष 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितता के मद्देनजर जांच कराने की घोषणा भी की गयी थी।
इन घोषणाओं के मद्देनजर कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने परीक्ष रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की है। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 की प्रक्रिया को स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने का उल्लेख किया गया है।