01 Sep 2026
रांची, 01 सितंबर (एजेंसी)। झारखंड उच्च न्यायालय ने दुमका जिले के जरमुंडी थाना क्षेत्र के कान्हैयापुर गांव की जमीन से जुड़े करीब पांच दशक पुराने विवाद में याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने भागीरथ कुमार एवं अन्य की सुनवाई करते हुए उनकी रिट याचिका खारिज कर दी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मौजूदा मामले में मौखिक बंटवारा गवाहों के साक्ष्य के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं की स्वीकारोक्ति से भी पुष्ट होता है। इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत ने कहा कि निचली तीनों प्राधिकरणों के निष्कर्षों में कोई ऐसी विकृति नहीं है, जिसके आधार पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप किया जाए। दरअसल यह मामला टाइटल पार्टिशन सूट नंबर 97/1975 से संबंधित था।
याचिकाकर्ताओं ने कान्हैयापुर मौजा की अनुसूची-बी में वर्णित जमीन के बंटवारे की मांग की थी।
उनका कहना था कि जमीन गैंटजर सेटलमेंट के समय उनके पूर्वजों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज थी और परिवार के सदस्यों के बीच वैध बंटवारा नहीं हुआ था। वहीं प्रतिवादियों का कहना था कि जमीन का मौखिक पारिवारिक बंटवारा कई दशक पहले हो चुका था और सभी पक्ष अपने-अपने हिस्से पर अलग-अलग कब्जे में थे। उनका दावा था कि यह बंटवारा गैंटजर सेटलमेंट से भी पहले हो चुका था।
अदालत ने कहा कि इस मामले में तीनों प्राधिकरणों ने साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद एक समान निष्कर्ष दिया है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय सामान्यतः निचली अदालत या प्राधिकरण द्वारा दर्ज तथ्यों के निष्कर्षों की दोबारा समीक्षा या साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं करता।