01 Sep 2026
बेंगलुरु, 01 सितंबर (एजेंसी। एशियाई खेल-2026 की तैयारियों के तहत भारतीय मध्य और लंबी दूरी के एथलीटों का राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर बेंगलुरु स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में चल रहा है। आठ सितंबर तक चलने वाले इस शिविर में एथलीटों को अत्याधुनिक ‘स्मार्ट ट्रैक’ की सुविधा भी मिल रही है, जो प्रशिक्षण के दौरान प्रदर्शन का रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराता है।
लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) के तहत स्वीकृत इस शिविर में 800 मीटर धावक कृष्ण कुमार, स्टीपलचेज धावक अविनाश साबले, हाई जंप खिलाड़ी आदर्श राम और सुप्रिया बी, डेकाथलॉन खिलाड़ी थौफीक एन, मध्य एवं लंबी दूरी की धावक पारुल चौधरी तथा रेस वॉकर मंजू रानी और प्रियंका हिस्सा ले रही हैं। ये सभी एशियाई खेलों के लिए स्वीकृत भारत की 73 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम का हिस्सा हैं। एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में आयोजित की जाएंगी।
दौड़ के दौरान मिलता है रियल टाइम डेटा
बेंगलुरु साई केंद्र में मौजूद स्मार्ट ट्रैक पर प्रशिक्षण के दौरान एथलीटों की गति, स्प्लिट टाइम, कुल समय, स्ट्राइड की लंबाई और स्ट्राइड की आवृत्ति जैसी जानकारियां तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं।
साई एनसीओई बेंगलुरु के एथलेटिक्स कोच सुरेश कुमार ने कहा कि यह भारत में अपनी तरह की विशेष सुविधा है। उनके मुताबिक, एथलीट के दौड़ने के साथ ही ट्रैक पर लगे टाइमिंग गेट रियल टाइम स्पीड और स्प्लिट टाइम दर्ज करते हैं। इससे कोच और खिलाड़ी प्रदर्शन का अधिक सटीक विश्लेषण कर सकते हैं।
स्मार्ट ट्रैक का इस्तेमाल राष्ट्रमंडल खेल 2026 के पैरा-एथलेटिक्स पदक विजेताओं दिलीप महादू गवित और मोहम्मद बासिल ने भी ग्लासगो खेलों से पहले प्रशिक्षण के दौरान किया था। दोनों ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीते थे।
2024 में स्थापित हुआ स्मार्ट ट्रैक
बेंगलुरु में यह स्मार्ट ट्रैक वर्ष 2024 में स्थापित किया गया था और तब से यहां प्रशिक्षण लेने वाले शीर्ष एथलीट इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रैक के सीधे हिस्से और मोड़ पर टाइमिंग गेट लगाए गए हैं, जिससे दौड़ के अलग-अलग चरणों का विश्लेषण किया जा सकता है। एक मोबाइल एप के माध्यम से भी आंकड़ों को तुरंत देखा और बाद में उनका विश्लेषण किया जा सकता है।
इस तकनीक की खासियत यह है कि इसके लिए नया ट्रैक बनाने की जरूरत नहीं होती। मौजूदा सिंथेटिक ट्रैक के नीचे चुंबकीय गेट लगाए जा सकते हैं और पूरी प्रणाली को एक दिन के भीतर स्थापित किया जा सकता है। स्मार्ट ट्रैक की टाइमिंग प्रणाली मौसम की स्थिति से भी प्रभावित नहीं होती। बारिश या धूल जैसी परिस्थितियों में भी ट्रैक में लगे टाइमिंग गेट काम करते रहते हैं, जिससे प्रशिक्षण के दौरान इलेक्ट्रॉनिक टाइमिंग का लाभ लगातार मिलता रहता है।
बेंगलुरु का साई केंद्र एशियाई खेलों से पहले इस शिविर में उच्चस्तरीय कोचिंग के साथ खेल विज्ञान और तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। शिविर में रेस वॉकिंग कोच रोनाल्ड गर्ड वाइगल, जंप्स कोच सहाना कुमारी नागराज गोब्बारगुंपी, कोच कल्याण चौधरी और मसाज विशेषज्ञ मीना सागर उगाले भी खिलाड़ियों के साथ काम कर रहे हैं।