02 Sep 2026
रायपुर, 2 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में स्नातक विद्यार्थियों से चिकित्सा सेवा को केवल पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत है।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज छात्रों को डिग्रियां मिल रही हैं, लेकिन कल उन्हें इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में सेवा, संवेदनशीलता और नैतिकता सबसे महत्वपूर्ण मूल्य हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापित एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान कम समय में छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है तथा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचा रहा है।
उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय तक विकास में रही बाधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब वहां बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को दिया। साथ ही कहा कि जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, वे अब विकास और अवसरों की पहचान बन रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर की चिकित्सा उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने राज्य में पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी भी संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संतुलित विकास और उच्च शिक्षा के विस्तार को आवश्यक बताते हुए कहा कि पिछले वर्षों में उच्च शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया है। एम्स रायपुर के इस दीक्षांत समारोह में भी 376 महिला और 313 पुरुष विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।
स्नातकों से नशीली दवाओं से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सक अपने ज्ञान, शोध और सेवा के माध्यम से देश के स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा दे सकते हैं।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा तथा कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक जिंदल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।