02 Sep 2026
नई दिल्ली, 02 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बीसीआई को निर्देश दिया कि वो किसी भी नीतिगत फैसले में अटार्नी जनरल (एजी) और सॉलिसिटर जनरल (एसजी) को सक्रिय रूप से शामिल करें। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बीसीआई चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश तो जारी नहीं किया लेकिन कहा कि आप एक निर्वाचित चेयरमैन की तरह कार्य नहीं कर सकते हैं बल्कि आप केवल एक प्रोटेम चेयरमैन हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मनन कुमार मिश्रा का कार्यकाल अगले चुनाव तक तदर्थ व्यवस्था की तरह है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वो सभी राज्यों के बार काउंसिल का चुनाव पूरा हो जाने के बाद ही बीसीआई के पुनर्गठन पर विचार करेगा। उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों के बार काउंसिल के चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि राज्य बार काउंसिल में दो महिला वकीलों को शामिल करने का काम दो हफ्ते में पूरा करें। उसके एक हफ्ते के अंदर सभी बार काउंसिल नवगठित काउंसिल को नोटिफाई करें। इस नोटिफिकेशन के तीन हफ्ते के अंदर राज्य बार काउंसिल अपने पदाधिकारियों का चुनाव पूरा करें।
मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई की। एक याचिका एम वर्धन ने दायर की है, जबकि दूसरी याचिका योगमाया एमजी ने दायर की है। इन याचिकाओं में बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती दी गई है। याचिका में मनन कुमार मिश्रा के चेयरमैन के रूप में लंबे समय तक बने रहने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि मनन कुमार मिश्रा पहली बार 2012 में बीसीआई चेयरमैन बने हैं। मार्च 2025 में उन्हें फिर से निर्विरोध चुना था। याचिकाकर्ता इसे मनन कुमार मिश्रा का लगातार सातवां कार्यकाल बता रहे हैं। याचिका में बीसीआई द्वारा अप्रैल 2025 में घोषित पांच साल के कार्यकाल को लेकर है।
याचिका में कहा गया है कि बीसीआई रुल्स के रुल 12(2) में चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के लिए दो साल के कार्यकाल या सदस्यता खत्म होने तक का प्रावधान है। याचिका में कहा गया है कि कोई प्रशासनिक नोटिफिकेशन नियमों द्वारा तय सीमा से ज्यादा कार्यकाल नहीं बढ़ा सकता है। याचिका में इस दलील को चुनौती दी गई है कि उत्तराधिकारी चुने जाने तक बीसीआई सदस्यों के पद पर बने रहने से चेयरमैन भी अनिश्चित काल तक पद पर बने रह सकते हैं। याचिका में कहा गया है कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 4(3) का प्रावधान केवल एक अंतरिम व्यवस्था है। यह चेयरमैन के अलग कार्यकाल को नहीं बढ़ाया है।