03 Sep 2026
नई दिल्ली, 03 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) कानून के छात्रों को उनके कॉलेज या यूनिवर्सिटी के अंदर किए गए किसी व्यवहार के लिए सजा नहीं दे सकती। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बीसीआई के पास कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कानून के छात्रों के व्यवहार और उनके अनुशासन का फैसला उनकी यूनिवर्सिटी या शैक्षणिक संस्थान ही कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बीसीआई ने मुख्य न्यायाधीश के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का विरोध कर रहे नालसार के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जो पत्र भेजे थे, वे उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे।
याचिका नालसार के पूर्व छात्रों मिहिर सूद और अभिषेक तिवारी ने दायर की थी। याचिका में बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के 13 अगस्त को उस सर्कुलर को चुनौती दी गई थी, जिसमें उन्होंने नालसार के छात्रों का बतौर वकील किसी भी बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था। हालांकि, इसका विरोध करने के बाद मनन मिश्रा ने वो सर्कुलर वापस ले लिया था।
दरअसल, नालसार के छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाथों दीक्षांत समारोह में डिग्री लेने से मना कर दिया था। इसके बाद मनन कुमार मिश्रा ने ये सर्कुलर जारी किया था।