03 Sep 2026
नई दिल्ली, 03 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर समेत देश के दूसरे हिस्से में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करने के दो आरोपितों को जमानत दे दी है। जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दोनों आरोपित करीब पांच साल से जेल में हैं और ट्रायल जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।
उच्च न्यायालय ने आरोपितों सोबिया अजीज और कामरान अशरफ रेशी को दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के दो जमानतियों की शर्त पर जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने दोनों आरोपितों को कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा कोर्ट ने दोनों आरोपितों को जांच में सहयोग करने और ट्रायल कोर्ट की हर सुनवाई की तिथि को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया। कोर्ट ने दोनों आरोपितों को किसी भी वैसे व्हाट्सऐप ग्रुप में जुड़ने से मना किया जो देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हों या वैसे कंटेंट को सर्कुलेट करते हों।
दोनों आरोपितों की पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की थी, जिसके बाद इन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पटियाला हाउस कोर्ट ने सोबिया अजीज की 14 मई को जमानत याचिका खारिज की थी, जबकि कामरान अशरफ रेशी की जमानत याचिका 17 मार्च को खारिज की थी। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 10 अक्टूबर 2021 को एफआईआर दर्ज की थी। एनआईए ने इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121ए, 122 और 123 और यूएपीए की धाराओं 18, 18ए, 20, 38 और 39 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। एनआईए ने सोबिया अजीज को 22 अक्टूबर 2021 को जबकि कामरान को 20 अक्टूबर 2021 को गिरफ्तार किया था।
एनआईए को ये पुख्ता सूचना मिली थी कि लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद , हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों के कार्यकर्ता जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं और वे पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारों पर काम कर रहे हैं। इन पर आरोप है कि वे साइबर स्पेस के जरिये जम्मू-कश्मीर और दिल्ली समेत देश के दूसरे बड़े शहरों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में थे। वे पाकिस्तान में बैठे आकाओं और ओवर ग्राऊंड कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्थानीय युवाओं को रिक्रूट कर उन्हें आतंकी गतिविधियों और हथियार और गोला-बारुद चलाने का प्रशिक्षण देने का काम कर रहे थे।