03 Sep 2026
नई दिल्ली, 03 सितंबर (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को केवल उसी जानकारी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसकी वे पुष्टि कर सकते हैं। बीएलए को वोटर के एन्यूमरेशन और डिक्लेरेशन फॉर्म में मौजूद सभी जानकारियों के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। जस्टिस अमित बंसल की बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कही।
उच्च न्यायालय ने ये टिप्पणी दिल्ली कांग्रेस के नेताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में निर्वाचन आयोग के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट को निजी अंडरटेकिंग देनी जरुरी की गई है कि वे एन्यूमरेशन फॉर्म में दी गई सभी जानकारियों को वेरिफाई करते हैं। दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंदर यादव और दिल्ली कांग्रेस के बूथ मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन राजेश गर्ग की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के लागू होने के पहले राजनीतिक दलों को 2002 के वोटर लिस्ट की प्रिंटेड और सॉफ्ट कॉपी के अलावा फ्रोजन फोटो वोटर लिस्ट उपलब्ध करायी जाए।
याचिका में निर्वाचन आयोग के 24 जून, 2025 के दिशा-निर्देश की धारा 9(डी)(4) को चुनौती दी गई है जिसके तहत बूथ लेवल एजेंट को एन्यूमरेशन फॉर्म से संबंधित जानकारी को निजी तौर पर वेरिफाई करते हुए अंडरटेकिंग देने को कहा गया है। याचिका में कहा गया है कि वोटर लिस्ट से संबंधित सूचना का वेरिफिकेशन करना बूथ लेवल अफसर, असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसरों और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसरों का एक वैधानिक कार्य है। इन कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों पर नहीं थोपा जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग का आदेश जनप्रतिनिधित्व कानून के नियमों के अनुकूल नहीं है।