05 Sep 2026
नवादा, 05 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जदयू प्रवक्ता एवं वर्तमान विधान पार्षद नीरज कुमार के मुकाबले नवादा के शिक्षाविद डॉ. अनुज सिंह को जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह द्वारा शनिवार को समर्थन देने की घोषणा से राजनीतिक हलकों में बवाल मच गया है। अनंत सिंह के इस ऐलान के बाद जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार के खेमे में भी हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, नवादा के शिक्षाविद डॉ. अनुज सिंह हाल में बाढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात मोकामा विधायक अनंत सिंह से हुई। मुलाकात के दौरान ही अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से होने वाले विधान परिषद चुनाव में डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने की घोषणा कर दी।
अनंत सिंह ने कहा कि विधान परिषद का स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव दलगत आधार पर नहीं होता है। इसलिए इस चुनाव में पार्टी से अलग हटकर योग्य उम्मीदवार के पक्ष में समर्थन किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह जदयू प्रवक्ता एवं वर्तमान विधान पार्षद नीरज कुमार के खिलाफ डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करेंगे और हर कीमत पर उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 26 विधानसभा क्षेत्र आते हैं और इन सभी क्षेत्रों में उनके समर्थक डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में काम करेंगे। अनंत सिंह ने दावा किया कि डॉ. अनुज सिंह की जीत के लिए वह खुद भी चुनावी मोर्चा संभालेंगे। उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि कोई ‘माई का लाल’ डॉ. अनुज सिंह को चुनाव नहीं हरा सकता।
अनंत सिंह ने यह भी कहा कि नीरज कुमार उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता हैं, लेकिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव दलगत चुनाव नहीं है। ऐसे में वह इस चुनाव में डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करेंगे। उनके इस बयान ने जदयू के भीतर और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
अनंत सिंह के खुले समर्थन के बाद अब पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव दिलचस्प होता नजर आ रहा है। एक ओर जदयू के मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ. अनुज सिंह को अनंत सिंह का खुला समर्थन मिलने से मुकाबले में नया मोड़ आ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस समर्थन का चुनावी समीकरण पर कितना असर पड़ता है।