07 Sep 2026
कोलकाता, 07 सितंबर (एजेंसी)। डायमंड हार्बर में आयोजित ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविर में गलत इलाज के मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 30 नवंबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी है। साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया है कि अभिषेक को पूछताछ के लिए बुलाने की जरूरत होने पर कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा।
सोमवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ में मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक के खिलाफ लगातार प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में एक ही व्यक्ति के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं और अदालत इससे परेशान है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि अगर अभिषेक खुद गलत इलाज में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे, तो उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत क्यों है। न्यायमूर्ति ने यह भी सवाल उठाया कि जिस मरीज के परिवार की ओर से गलत इलाज का आरोप लगाया गया है, क्या उन्होंने पहले संबंधित सक्षम प्राधिकार के समक्ष शिकायत की थी।
अदालत ने कहा कि चिकित्सा में लापरवाही के मामले में मरीज या उसके परिवार के पास राज्य चिकित्सा परिषद, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और उपभोक्ता संरक्षण विभाग जैसे संबंधित मंचों पर शिकायत करने का विकल्प है। अदालत ने पूछा कि क्या इन संस्थाओं के समक्ष कोई शिकायत दर्ज कराई गई थी।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अभिषेक सीधे तौर पर गलत इलाज में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने नियमों का पालन किए बिना ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया था। राज्य का कहना था कि नैदानिक प्रतिष्ठान कानून के तहत इस तरह की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक अनुमति लेना जरूरी है। आरोप है कि शिविर में अनुमति के बिना एक्स-रे और अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
इस पर अदालत ने फिर सवाल किया कि यदि अभिषेक स्वयं किसी मरीज का इलाज नहीं कर रहे थे और कथित गलत इलाज में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे, तो उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने का औचित्य क्या है?
इसी दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, “बहुत हो गया, अब और नहीं।” अदालत ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में एक व्यक्ति के खिलाफ लगातार कई मामले दर्ज किए गए हैं। न्यायमूर्ति ने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह प्राथमिकी दर्ज होती रहीं तो अदालत को आगे और कड़े निर्देश देने पड़ सकते हैं।
अदालत ने इस संदर्भ में वर्तमान मुख्यमंत्री और ममता बनर्जी के शासन में तत्कालीन विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के मामले का उदाहरण भी दिया। न्यायमूर्ति ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अभिषेक के मामले में भी शुभेंदु अधिकारी की तरह निर्देश दिया जा सकता है। उस मामले में अदालत ने निर्देश दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना शुभेंदु के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।
‘सेवाश्रय’ को लेकर अभिषेक के खिलाफ पहली शिकायत भाजपा नेता अभिजीत दास उर्फ बॉबी ने विष्णुपुर थाने में दर्ज कराई थी। इसके बाद एक मरीज के परिवार की शिकायत के आधार पर रवींद्रनगर थाने में अभिषेक समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। अभिजीत दास इससे पहले दो बार चुनाव में अभिषेक के खिलाफ मैदान में उतर चुके हैं और दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
अदालत ने शिकायतकर्ता के अभिषेक के खिलाफ पहले चुनाव लड़ने के तथ्य पर भी सवाल उठाया। हालांकि शिकायतकर्ता के वकील जयंत नारायण चट्टोपाध्याय ने कहा कि केवल चुनाव में हारने के आधार पर उनके मुवक्किल की शिकायत की सत्यता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
अभिषेक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण और अयन भट्टाचार्य ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान बताया गया कि अभिषेक 3 सितंबर को विदेश गए हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार तीन सप्ताह तक विदेश में रहेंगे। उनके 22 सितंबर को लौटने की संभावना है।
हाई कोर्ट ने कहा कि अभिषेक के लौटने के बाद पुलिस आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकती है। हालांकि इसके लिए उन्हें कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि कथित गलत इलाज को लेकर मरीज या उसके परिवार की ओर से संबंधित प्राधिकार के समक्ष की गई किसी भी शिकायत के दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए जाएं।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 30 नवंबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी। साथ ही जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।