07 Sep 2026
नई दिल्ली, 07 सितंबर (एजेंसी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को निर्देश दिया है कि वो दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बिल्डिंग के अचानक भरभराकर गिरने के मामले की उच्चस्तरीय जांच करे। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वो इस हादसे में फंसे छात्रों को बचाने के काम में तेजी लाए। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि 50 छात्रों का जीवन खतरे में है, उनमें से अधिकतर शायद अभी भी मलबे के नीचे दबे हैं। इससे दुखद क्या हो सकता है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम को उच्चस्तरीय जांच का आदेश देते हुए कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या किया गया, ये कोर्ट को सूचित करें। उच्च न्यायालय ने इस बात पर अफसोस जताया कि हर दो साल के बाद दिल्ली में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। आखिर दिल्ली सरकार ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कर रही है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राहत और बचाव कार्य पूरी गति से चल रहा है। हरसंभव कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस घटना और मलबे में फंसे लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने पर चिंता जताते हुए कहा कि मौत पर सनसनी पैदा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सर्कुलेट नहीं करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। तब कोर्ट ने कहा कि हम इस पर विचार करेंगे।
याचिका लॉ छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता ने दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की जांच की जाए। याचिका में हादसे में मृत छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की गई। याचिका में मांग की गई कि इस हादसे में घायल छात्रों को चिकित्सा सुविधा और प्रभावित छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित किया जाए। इसके साथ ही दिल्ली के पेईंग गेस्ट (पीजी) और हॉस्टल की स्ट्रक्चरल ऑडिट की जाए ताकि खतरनाक स्थानों का पता लगाया जा सके।
याचिका में कहा गया है कि जिस "Hostel Daze Boys PG” में हादसा हुआ वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक है और वो स्टूडेंट हब है। इस पीजी में बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं। ये हादसा 6 सितंबर को दोपहर डेढ़ बजे हुआ जिसके बाद मलबे में कई छात्र दब गए। याचिका में एम्स अस्पताल के बयान का जिक्र किया गया है जिसमें पांच छात्रों की मौत की बात कही गई है।
याचिका में कहा गया है कि इस हादसे की वजह की जांच कर जवाबदेही तय की जाए। इस बात की जांच की जाए कि संबंधित पीजी के पास वैध लाईसेंस था कि नहीं और उसे संचालित करने की अनुमति मिली थी कि नहीं।