07 Sep 2026
नई दिल्ली, 07 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध के दायरे में लाने की मांग वाली याचिकाओं पर 9 सितंबर को ही सुनवाई करेगा। सोमवार को वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने इस मामले को मेंशन करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच से कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार का जवाबी हलफनामा नहीं आया है, इसलिए सुनवाई 9 सितंबर की जगह नवंबर में कर दी जाए। तब कोर्ट ने कहा कि वो 9 सितंबर को ही इस पर फैसला करेंगे।
इस मामले में केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर कर वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध के दायरे में लाने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया है। मौजूदा कानून के मुताबिक पत्नी की इच्छा के बगैर जबरन संबंध बनाने पर भी पत्नी अपने पति पर दुष्कर्म का मुकदमा नहीं कर सकती। सरकार ने कानून में पति को मिली इस छूट का समर्थन किया है।
केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा है कि इसका मतलब ये नहीं वैवाहिक संबंधों में पत्नी की इच्छा का कोई महत्व नहीं है। सरकार का कहना है कि अगर पत्नी की इच्छा के बिना पति जबरन संबंध बनाता है, तो ऐसी सूरत में पति को सजा देने लिए पहले से वैकल्पिक कानूनी प्रावधान है। ऐसी स्थिति में घरेलू हिंसा कानून, महिलाओं की गरिमा भंग करने से जुड़े विभिन्न प्रावधान के तहत पति पर केस दर्ज किया जा सकता है, लेकिन इस स्थिति की तुलना उस स्थिति से नहीं की जा सकती है, जहां बिना वैवाहिक संबंधों के कोई पुरुष जबरन किसी महिला के साथ संबंध बनाता है। वैवाहिक संबंधों और बिना वैवाहिक के बने ऐसे संबंधों में सजा एक नहीं हो सकती।
उच्चतम न्यायालय ने 16 सितंबर, 2022 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। उच्चतम न्यायालय को ये तय करना है कि पति का पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाना दुष्कर्म है कि नहीं। इसके पहले 11 मई, 2022 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने वैवाहिक दुष्कर्म के मामले पर विभाजित फैसला दिया था। जस्टिस राजीव शकधर ने जहां भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद को असंवैधानिक करार दिया था, वहीं जस्टिस सी हरिशंकर ने इसे सही करार दिया है। अब उच्चतम न्यायालय इस मामले पर सुनवाई कर रहा है।