08 Sep 2026
जयपुर, 08 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी पूर्व जनप्रतिनिधि पर बकाया राशि की वसूली उसके पति या परिवारजनों से नहीं की जा सकती और ना उन्हें इसके लिए बाध्य किया जा सकता है। कोई जन-प्रतिनिधि अपने शर्मनाक काम या किसी गलत व्यवहार के लिए खुद ही जिम्मेदार और जवाबदेह होता है। यदि उसके खिलाफ कोई रिकवरी की कार्यवाही शुरू होती है तो बकाया रकम चुकाने और जमा करने के लिए वह अकेला ही जिम्मेदार होता है। अदालत ने कहा कि पति और पत्नी स्वतंत्र कानूनी इकाइयां हैं तथा एक के कृत्य या कथित अनियमितता की जिम्मेदारी दूसरे पर तब तक नहीं डाली जा सकती, जब तक कि उसकी संलिप्तता साबित न हो। इसके साथ ही अदालत ने मामले में प्रार्थी और पूर्व महिला सरपंच के पति को राहत देते हुए संबंधित अफसरों को निर्देश दिया कि वह उसे आगामी पंचायत राज चुनाव लडऩे के लिए तत्काल एनओसी जारी करें। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश बूंदी जिला निवासी राम लक्ष्मण मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता अपनी पत्नी की बकाया रकम के लिए ना तो जमानत देने वाला है और ना ही गारंटर है। यह मामला राज्य सरकार व पूर्व महिला सरपंच के बीच का एक अलग व स्वतंत्र मामला है। अदालत ने अफसरों के रवैये पर अफसोस जताते हुए कहा कि उन्होंने याचिकाकर्ता को उसकी पूर्व सरपंच पत्नी की बकाया रकम जमा करवाने के लिए मजबूर किया। जबकि उसे जीवन साथी के गलत व्यवहार के लिए जब तक जिम्मेदारी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि वे खुद उसमें शामिल न रहे हो।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत फलेन्डा के आगामी पंचायती राज चुनाव में लडऩा चाहता है, लेकिन अफसर उसे एनओसी पत्र जारी नहीं कर रहे, क्योंकि उसकी पत्नी साल 1995 से 2000 में ग्राम पंचायत फलेन्डा की सरपंच रहीं थी। उसकी पत्नी के खिलाफ जांच के बाद एक वसूली आदेश जारी किया, लेकिन वह बकाया राशि जमा नहीं करा पाई और उनकी संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई शुरू हुई। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में उसने याचिका दायर की और अदालत ने सितंबर 2009 में अंतरिम आदेश से यह कार्रवाई रोक दी। उसकी याचिका लंबित चल रही है, लेकिन अफसर उसकी पत्नी की बकाया राशि नहीं चुकाने के कारण उसे एनओसी जारी नहीं कर रहे हैं। जिसके चलते वह चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहा है।