09 Sep 2026
भोपाल, 09 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर कमला पार्क के पास सड़क पर धरना दे रहे हैं। उन्होंने आज बुधवार को भी नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी के बहिष्कार का ऐलान किया है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं को आंदोलन से बाहर रखा गया है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है।
डॉक्टरों की मांग है कि इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपए किया जाए। उनका कहना है कि सरकार की ओर से मांग पर ठोस और लिखित निर्णय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सरकार डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत के जरिए गतिरोध दूर करने का प्रयास कर रही है।
कमला पार्क के पास रातभर डटे रहे डॉक्टर
भोपाल में इंटर्न डॉक्टर सोमवार से कमला पार्क के पास धरने पर हैं। मंगलवार रात तक डॉक्टर सड़क पर ही डटे रहे। प्रदर्शन स्थल पर उन्होंने भोजन और रात में रुकने के लिए गद्दों की व्यवस्था भी कर ली थी। पुलिस और प्रशासन ने यातायात सुचारु रखने के लिए सड़क खाली करने की अपील की, लेकिन डॉक्टरों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। धरने के कारण पुराने शहर के कुछ हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने एंबुलेंस और जरूरी वाहनों को रास्ता देने की बात कही। प्रशासन की ओर से भी ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सीनियर रेजिडेंट्स भी समर्थन में
इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन से जुड़ गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के बाद सीनियर रेजिडेंट्स ने भी ओपीडी समेत गैर-आवश्यक सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने पर सहमति है।
इंदौर के एमवाय अस्पताल, खंडवा मेडिकल कॉलेज सहित प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी डॉक्टरों के प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। इससे नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है, जबकि इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है।
हमीदिया में मरीजों को परेशानी, सीनियर डॉक्टर संभाल रहे ओपीडी
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों के काम से अलग रहने के कारण ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। जूनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति में प्रोफेसर और सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जा रही हैं।
वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी नाराजगी
इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का दूसरा प्रमुख मुद्दा सोमवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का विरोध है। डॉक्टरों का आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया गया। डॉक्टर इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद वाटर कैनन के इस्तेमाल की जांच के आदेश दिए गए हैं। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि डॉक्टरों की मांगों का समाधान बातचीत और संवेदनशीलता के जरिए होना चाहिए।
सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी
आंदोलन खत्म कराने के लिए सरकार की ओर से डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से चर्चा की जा रही है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर चुके हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भी मंगलवार को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और डॉक्टरों से चर्चा की।
प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार के स्तर पर बातचीत चल रही है और समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे।