09 Sep 2026
नोएडा/नई दिल्ली, 8 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय तक अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी राकेश मेहता (74 वर्ष) का नोएडा स्थित आवास पर निधन हो गया है। उनका शव सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसायटी के एक फ्लैट में पंखे से लटका हुआ बरामद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। मौके से एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने मानसिक तनाव और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को इस आत्मघाती कदम की वजह बताया है।
परिजनों के मुताबिक लगातार फोन करने पर भी नहीं मिला जवाब, तब हुआ शक
पुलिस का कहना है कि मेहता गंभीर बीमारी से परेशान थे, पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फेस-2 थाना पुलिस और आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
एसीपी दीक्षा सिंह (Noida Police) ने आधिकारिक बयान में कहा, "हमें डायल-112 के जरिए घटना की सूचना मिली थी, जिसके बाद फेस-2 थाना पुलिस तुरंत केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे खोलने पर पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का शव फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपनी गंभीर बीमारी और मानसिक परेशानी का जिक्र किया है और लिखा है कि वे इससे तंग आकर यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद सोमवार को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।"
कड़क' और 'ईमानदार' सुधारक, जिसने दिल्ली की सूरत बदली: राकेश मेहता केवल एक नौकरशाह नहीं थे, बल्कि वे दिल्ली को आधुनिक बनाने वाले मुख्य शिल्पकारों में से एक थे। जब वे दिल्ली नगर निगम (MCD) के आयुक्त थे, तब राजधानी में टोल टैक्स का निजीकरण करना और प्रॉपर्टी टैक्स के लिए ऐतिहासिक 'यूनिट एरिया सिस्टम' (Unit Area System) को लागू करवाना उन्हीं जैसे कड़क और बेदाग छवि वाले अफसर के बूते की बात थी। इसके अलावा DTC के सीएमडी रहने के दौरान उन्होंने दिल्ली की हवा और परिवहन व्यवस्था दोनों को नई दिशा दी—सड़कों पर प्रदूषण मुक्त सीएनजी (CNG) और अत्याधुनिक लो-फ्लोर बसें उतारने में उनकी मुख्य भूमिका रही। एक बेहद काबिल, शालीन और मीडिया-फ्रेंडली अधिकारी का इस तरह अवसाद और बीमारी के चलते दुनिया से चले जाना पूरे प्रशासनिक और पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
2010 राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान संभाली थी दिल्ली की कमान:
राकेश मेहता दिल्ली के सबसे कुशल और प्रभावशाली नौकरशाहों में गिने जाते थे।
शीला दीक्षित सरकार में भूमिका:
वे तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान 2007 से 2010 तक तीन साल से अधिक समय तक दिल्ली के मुख्य सचिव रहे। बिजली के निजीकरण के दौर में भी वे दिल्ली सरकार में बिजली सचिव की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2010:
दिल्ली में आयोजित हुए 2010 के ऐतिहासिक राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के दौरान प्रशासनिक कमान उन्हीं के हाथों में थी।
नीतियों को लागू करने का माद्दा:
उनके पूर्व सहयोगियों और राजनेताओं के अनुसार, वे कभी फाइलों को अटकाते नहीं थे, बल्कि हमेशा नई नीतियों और क्रांतिकारी विचारों को लागू करने के लिए तैयार रहते थे।
नोएडा पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की आगे की विस्तृत जांच जारी है।