09 Sep 2026
हर साल 10 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक याद है—कि आत्महत्या को रोका जा सकता है, और इसकी जिम्मेदारी सिर्फ व्यक्ति की नहीं, बल्कि हम सबकी है।
2024 से 2026 तक का वैश्विक थीम है—“Changing the Narrative on Suicide” यानि आत्महत्या पर बातचीत का तरीका बदलना। 2026 के लिए खास संदेश है: “Start the Conversation”—बातचीत शुरू करें।
आंकड़े चुभते हैं, पर सवाल बड़े हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल दुनिया में 7,20,000 से ज्यादा लोग आत्महत्या कर लेते हैं। भारत में 2024 में अकेले 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की—यानि हर दिन सैकड़ों जिंदगियां अधूरी रह गईं।
इन आंकड़ों के पीछे सिर्फ “डिप्रेशन” या “तनाव” जैसे शब्द नहीं हैं। इनके पीछे हैं—परिवारिक दबाव, आर्थिक तंगी, पढ़ाई का बोझ, रिश्तों में दरारें, अकेलापन, और कभी-कभी वो खामोशी जो मदद मांगने से पहले ही इंसान को तोड़ देती है।
डिजिटल मीडिया: खतरा भी, उम्मीद भी
आज का युग डिजिटल है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप्स, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब वीडियो—हमारी बातचीत का बड़ा हिस्सा अब स्क्रीन पर होता है। इसका असर आत्महत्या जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी पड़ता है।
एक तरफ, गलत जानकारी, सनसनीखेज खबरें, और “ग्लैमराइज्ड” कंटेंट से नुकसान हो सकता है। दूसरी तरफ, डिजिटल प्लेटफॉर्म ही वो जगह हैं जहां से जागरूकता, सहानुभूति, और मदद का हाथ सबसे तेजी से पहुंच सकता है।
WHO और IASP की गाइडलाइन्स कहती हैं—खबरें या पोस्ट शेयर करते समय संवेदनशीलता बरतें। आत्महत्या की खबरों को सनसनीखेज अंदाज में पेश न करें।
हम क्या कर सकते हैं?
1. बातचीत शुरू करें
किसी दोस्त, सहपाठी, सहकर्मी या परिवार के सदस्य से पूछें—“तुम ठीक तो हो?” कभी-कभी एक सच्चा सवाल ही किसी की जिंदगी बचा सकता है।
2. स्टिग्मा तोड़ें
मेंटल हेल्थ को लेकर शर्म या डर की बात नहीं है। डिजिटल मीडिया पर सही जानकारी शेयर करें, गलतफहमियां दूर करें, और यह संदेश फैलाएं कि मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि हिम्मत है।
3. जिम्मेदारी से शेयर करें
खबरें या पोस्ट शेयर करते समय संवेदनशीलता बरतें। आत्महत्या की खबरों को सनसनीखेज अंदाज में पेश न करें। WHO और IASP की गाइडलाइन्स का पालन करें।
4. हेल्पलाइन्स और संसाधनों को प्रमोट करें
किरण हेल्पलाइन (1800-599-0019), iCall (9152987821), और अन्य मेंटल हेल्थ सर्विसेज के नंबर शेयर करें। डिजिटल अभियानों में इन जानकारियों को शामिल करें।
5. युवाओं तक पहुंचें
स्कूल, कॉलेज, और वर्कप्लेस में मेंटल हेल्थ पर चर्चा को प्रोत्साहित करें। डिजिटल कैंपेन, वेबिनार, और ऑनलाइन वर्कशॉप के जरिए युवाओं तक सही संदेश पहुंचाएं।
बदलिए कहानी, बचाइए जिंदगियां
आत्महत्या रोकथाम सिर्फ पॉलिसी या हेल्थकेयर सिस्टम का काम नहीं है। यह हर उस इंसान का काम है जो किसी और की जिंदगी से जुड़ा है। डिजिटल मीडिया ने हमें एक नई ताकत दी है—दूर बैठे हुए भी पास होने की। इस ताकत का इस्तेमाल सहानुभूति, समझ, और उम्मीद फैलाने के लिए करें।
इस आत्महत्या रोकथाम दिवस, वादा करें कि आप खामोशी नहीं तोड़ेंगे—बल्कि बातचीत शुरू करेंगे। क्योंकि कभी-कभी एक सही वक्त पर कहा गया शब्द किसी की पूरी कहानी बदल सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं टिप्पणीकार हैं)