09 Sep 2026
नई दिल्ली, 09 सितंबर (एजेंसी)। नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े एक छात्रा को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लेने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में यह बात कही।
उप्र सरकार नोएडा के मजदूर आंदोलन के मामले में छात्रा आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। उच्च न्यायालय ने हिरासत को मनमाना बताते हुए गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम और दूसरे अधिकारियों के वेतन से आकृति को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
अप्रैल में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान आकृति चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ये प्रदर्शन मजदूरों के अधिकारों और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुआ था। बाद में जिला प्रशासन ने आकृति पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए रासुका लगा दिया था। आकृति ने इस कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि आकृति की तरफ से हिंसा के लिए लोगों को उकसाने के ठोस सबूत नहीं हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना और अपनी बात रखना संविधान से मिला अधिकार है। उच्च न्यायालय ने आकृति की हिरासत को रद्द करते हुए उसे पांच लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ये रकम डीएम और दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए।