12 Sep 2026
नई दिल्ली, 12 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे विभिन्न देशों के नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान स्वागत समारोह की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध श्री रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर दिखाई गई। भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती इस तस्वीर ने विश्व नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई नेताओं का स्वागत किया।
स्वागत समारोह के लिए भारत मंडपम में तैयार किए गए प्रवेश क्षेत्र में भारत की विविध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित किया गया था। इसी क्रम में रामेश्वरम के श्री रामनाथस्वामी मंदिर को पृष्ठभूमि में प्रमुख स्थान दिया गया।
मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग का स्वागत किया और उन्हें तमिलनाडु के रामेश्वरम में स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर के महत्व के बारे में बताया। इस दौरान मंदिर की भव्य छवि विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।
श्री रामनाथस्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित भारत के सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में से एक है। यह मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है, इसलिए हिंदू धर्म में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के दौरान यहां भगवान शिव की पूजा की थी। इसी धार्मिक परंपरा के कारण रामेश्वरम का संबंध रामायण की कथा और भगवान राम की आराधना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
रामनाथस्वामी मंदिर अपनी विशाल स्थापत्य कला और विश्वप्रसिद्ध लंबे गलियारों के लिए भी जाना जाता है। मंदिर के विशाल स्तंभों से सुसज्जित गलियारे भारतीय मंदिर वास्तुकला की भव्यता का अद्भुत उदाहरण माने जाते हैं। रामेश्वरम हिंदू तीर्थ परंपरा में भी विशेष महत्व रखता है और इसे चार धामों में से एक माना जाता है।
इस प्रकार ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर का दिखाई देना केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी आध्यात्मिक परंपरा, धार्मिक आस्था और समृद्ध स्थापत्य विरासत को दुनिया के सामने रखने का भी प्रतीक बना।