11 Sep 2026
प्रयागराज, 11 सितंबर (एजेंसी)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर राज्य सरकार को 03 सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने राज्य सरकार को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर तय की है। साथ ही, कोर्ट ने अगली तारीख तक याचिकाकर्ता से 6 करोड़ रुपये से अधिक के जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी है। यह आदेश मोहम्मद तनवीर अहमद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दाखिल याचिका पर पारित किया गया।
याचिका में सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा 16 जुलाई 2026 को दिए गए बेदखली व 6 करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक के जुर्माने के आदेश और 2 सितंबर 2026 को जिला जज सहारनपुर द्वारा अपील खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार (सहारनपुर जिलाधिकारी के माध्यम से) और कलेक्ट्रेट परिसर मस्जिद के प्रबंधक/मौलवी अब्दुल हमीद को प्रतिवादी बनाया गया है।
मामले से जुड़े मुख्य बिंदु:
याचिकाकर्ता का पक्ष: याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने दलील दी कि दोनों अधिकारियों के आदेश बिना अधिकार क्षेत्र (जूरिडिक्शन) के हैं। संपत्ति के मालिकाना हक की सही जांच किए बिना ही बेदखली का आदेश दे दिया गया, जबकि अभिलेखों में वाहिद खान और याकूब खान का नाम दर्ज था। 1956 के राजस्व रिकॉर्ड को अधिकारियों ने यह कहकर नजरअंदाज कर दिया कि प्रविष्टियां फर्जी हैं। यह भी कहा गया कि मस्जिद वक्फ रजिस्टर में दर्ज है, जिसे निचली अदालतों ने अनदेखा किया।
राज्य सरकार का तर्क: अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का रुख विरोधाभासी है—एक तरफ वह जमीन को जमींदार की बता रहे हैं और दूसरी तरफ वक्फ संपत्ति, लेकिन वक्फ को समर्पित (डेडिकेशन) किए जाने का कोई प्रमाण नहीं है। सुन्नी सेंट्रल बोर्ड को इसमें पक्षकार भी नहीं बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में यह जमीन 'कलेक्ट्रेट कचहरी' के नाम दर्ज है।
पृष्ठभूमि:
उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को बेदखली और अवैध कब्जे के एवज में 6,41,65,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। 2 सितंबर 2026 को जिला जज ने इस आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद प्रशासन ने 5 सितंबर की तड़के कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में बनी इस मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।