14 Sep 2026
भागलपुर, 14 सितंबर (इंंद्रप्रस्थ न्यूज)। भागलपुर में गंगा का उफान अब सिर्फ घरों, खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बाढ़ ने इंसान की अंतिम विदाई की जगह तक छीन ली है।
क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति इस कदर विकट हो चुकी है कि बरारी श्मशान घाट पूरी तरह पानी में डूब चुका है और लोग मजबूरी में मुख्य सड़क के किनारे ऊंची जगहों पर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने को विवश हैं। जहाँ कभी अंतिम क्रिया के लिए विधिवत लकड़ियाँ सजती थीं, वहाँ अब चारों तरफ सिर्फ गंगा का पानी पसरा हुआ है।
श्मशान घाट का एक बड़ा हिस्सा और वहां बना शेड पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। ऐसे में शव लेकर पहुंचने वाले परिजनों को सड़क किनारे ही कोई ऊंची और अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह तलाशनी पड़ रही है। एक तरफ गंगा का बढ़ता पानी, दूसरी तरफ सड़क पर जलती चिता और बीच में वाहनों की आवाजाही—भागलपुर में बाढ़ की यह विचलित कर देने वाली तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी लाचारी को उजागर कर रही है।
बारिश और बाढ़ के इस दौर में अपनों को मुखाग्नि देना भी किसी कड़ी परीक्षा से कम नहीं रह गया है। बाढ़ के पानी के कारण सूखी लकड़ियां मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अमरपुर से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे लोगों ने बताया कि सामान्य दिनों में श्मशान घाट के आसपास लकड़ी और अन्य पूजन सामग्री आसानी से मिल जाती थी, लेकिन बाढ़ ने पूरी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। अब परिजन को शव घाट तक लाने, लकड़ी जुटाने, चिता सजाने और गीली लकड़ियों के बीच चिता जलाने के लिए पानी, कीचड़ और भारी यातायात के बीच जूझना पड़ रहा है।
बरारी मुख्य सड़क के किनारे हो रहे अंतिम संस्कार का सीधा असर आम जनजीवन पर भी पड़ रहा है। सड़क से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों को चिताओं से उठते घने धुएं के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। हालांकि, इन दृश्यों के पीछे सबसे बड़ी पीड़ा उन परिवारों की है, जो इस संकट की घड़ी में भी अपने प्रियजनों को सम्मानजनक विदाई देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां बाढ़ के बीच लकड़ी खरीदने से लेकर चिता जलाने तक हर कदम पर आफत है। पानी और कीचड़ के बीच किसी तरह धार्मिक रीतियों को पूरा करना पड़ रहा है, क्योंकि मृत्यु किसी बाढ़ का इंतजार नहीं करती और अंतिम संस्कार को टाला नहीं जा सकता।
उधर गंगा के बढ़ते जलस्तर का कहर सिर्फ बरारी तक सीमित नहीं है। सुल्तानगंज का श्मशान घाट भी पूरी तरह पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो चुका है। घाट के चारों तरफ पानी भर जाने के कारण वहाँ भी शवों के अंतिम संस्कार को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक बाढ़ का पानी कम नहीं होता, तब तक दाह संस्कार के लिए किसी वैकल्पिक और सुरक्षित स्थान की तत्काल व्यवस्था की जाए।