15 Sep 2026
जबलपुर, 15 सितंबर (एजेंसी)। मध्य प्रदेश में नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के निर्णय का इंतजार है।
दरअसल, मंगुभाई पटेल ने आठ जुलाई 2021 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल का पद संभाला था। उनका पांच वर्ष का कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा हो चुका है। इसके बावजूद प्रदेश में अब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हुई है।
इसी मुद्दे को लेकर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त डॉ. एबी खान ने आठ अगस्त को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जब पूर्व राज्यपाल का निर्धारित कार्यकाल पूरा हो चुका है, तो ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का कार्यभार सौंपा जाना चाहिए।
मंगलवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल कोर्ट में उपस्थित हुए। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 156 के तहत नया राज्यपाल नियुक्त होने तक पूर्व राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय रायजादा और अभिमन्यु सिंह के मुताबिक, भारत सरकार के आठ जुलाई 2021 के राजपत्र में मंगुभाई पटेल की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पांच वर्ष के लिए किए जाने का उल्लेख है।
उनके मुताबिक यह अवधि सात जुलाई 2026 को पूरी हो चुकी है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पूर्व में ऐसी परिस्थितियों में संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक राज्यपाल का दायित्व सौंपे जाने के उदाहरण रहे हैं। याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति के सचिव, भारत सरकार के विधि मंत्रालय और राज्यपाल के सचिव को पक्षकार बनाते हुए मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की है।