15 Sep 2026
नई दिल्ली, 15 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में मजबूती के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी पूरे दिन दबाव में रहे। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी-50 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत टूटकर 23,118.60 अंक पर पहुंच गया। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान है।
शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली ने बदली बाजार की चाल
मंगलवार को शेयर बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांकों में तेजी का रुख बना। हालांकि, यह मजबूती ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार कमजोर होते चले गए।
दोपहर तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन खरीदारी के मुकाबले बिकवाली का दबाव अधिक रहा। कारोबार के अंतिम चरण में गिरावट और गहरी हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुए। इससे बाजार में निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशीलता का संकेत मिला।
निवेशकों की संपत्ति में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी
शेयर बाजार में तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में मंगलवार को करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान है।
बैंकिंग और ऑटो शेयरों में दबाव
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। इन क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों में कमजोरी ने बाजार की गिरावट को बढ़ाया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव दिखाई दिया।
इसके विपरीत आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों में मजबूती रही। हालांकि, आईटी शेयरों की खरीदारी बाजार की समग्र गिरावट को थामने में पर्याप्त साबित नहीं हुई। निवेशकों का ध्यान वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और आर्थिक अनिश्चितताओं से जुड़े घटनाक्रमों पर बना रहा।
कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों का असर
मंगलवार को बाजार की धारणा प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर शामिल रहा। कच्चे तेल की महंगाई से कंपनियों की लागत बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की आशंका रहती है। इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर भी बाजार में सतर्कता रही। ब्याज दरों के भविष्य के रुख और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया।
आगे के कारोबार में वैश्विक संकेत अहम
मंगलवार की गिरावट के बाद आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर निवेशकों की नजर रहेगी। घरेलू बाजार में भी कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आर्थिक आंकड़ों से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए जोखिम का आकलन और सतर्क निवेश रणनीति महत्वपूर्ण बनी हुई है।